पीएम मोदी ने सेवा यात्रियों से किया वर्चुअल संवाद, कहा – भारत की भव्यता किताबों में नहीं, जमीनी अनुभवों में है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा संकल्प अभियान के तहत वाराणसी से वडनगर तक निकाली जा रही सेवा यात्रा के प्रतिभागियों के साथ वर्चुअल माध्यम से सीधा संवाद किया। इस बातचीत के दौरान उन्होंने यात्रियों का हालचाल जाना और उनके सफर के खट्टे-मीठे अनुभवों को समझा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के दौरान मिलने वाले अनुभव बेहद अमूल्य हैं और यह यात्रा जीवन भर के लिए एक नई ऊर्जा भरने का काम करेगी।
काशी से वडनगर तक सेवा और संस्कारों का संगम संवाद के दौरान पीएम ने कहा कि बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का आशीर्वाद लेकर हाटकेश्वर महादेव के दर्शन के लिए आगे बढ़ना एक बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वडनगर की मिट्टी ने उन्हें बुनियादी संस्कार दिए, जबकि काशी ने उन संस्कारों में सेवा के विविध रंग भरे। उन्होंने यात्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवा साथी सेवा, संस्कार और संकल्प के रंगों से इस पूरी यात्रा को जीवंत बना रहे हैं।
स्थानीय लोगों का स्नेह और सेवा यात्रियों का उत्साह बातचीत के दौरान उत्तर प्रदेश के सेवा यात्री कुलदीप पटेल ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि गांवों में रात्रि विश्राम के दौरान स्थानीय लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और बच्चों में भी यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखा गया। सफर की थकान के सवाल पर यात्रियों ने बताया कि पीएम की प्रेरणा और जनसेवा के प्रति स्नेह के कारण उन्हें किसी भी तरह की परेशानी महसूस नहीं हो रही है।
किताबों से परे भारत की वास्तविक भव्यता का अनुभव प्रधानमंत्री ने यात्रियों को प्रेरित करते हुए कहा कि असली भारत की विशालता और विविधता को किताबों के जरिए नहीं समझा जा सकता। अलग-अलग राज्यों के गांवों में जाकर वहां की परंपराओं, खान-पान और संस्कृति से जुड़ना जीवन का एक बड़ा खजाना है। उन्होंने कहा कि जब इंसान समाज से जुड़ता है तो उसे सेवा का सच्चा आनंद मिलता है, जो जीवन भर मार्गदर्शक का काम करता है।
सुरक्षा की सलाह और जमीनी जुड़ाव की सीख मध्य प्रदेश के रायसेन से जुड़े यात्री प्रदीप मुखर्जी से संवाद करते हुए पीएम मोदी ने यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान रखने और हमेशा हेलमेट पहनने की सलाह दी। उन्होंने पूछा कि क्या यात्री गांवों में लोगों के बीच समय बिताते हैं या आगे बढ़ने की जल्दी में रहते हैं। इस पर यात्रियों ने कहा कि वे पूरी निष्ठा के साथ जनसेवा और संवाद में समय बिता रहे हैं।
सरकारी योजनाओं का जमीनी असर और आत्मसंतोष प्रधानमंत्री ने कहा कि जब कोई सरकारी योजना समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती है और उसके जीवन में बदलाव लाती है, तो उसका संतोष अद्भुत होता है। यह यात्रा केवल सफर नहीं बल्कि एक प्रशिक्षण है, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि योजनाओं का असली मकसद केवल धन खर्च करना नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना है।
