मन की बात में पीएम मोदी का संदेश: सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक आतंकवाद पर भारत का नया प्रहार

देश की सुरक्षा और सेना के शौर्य का गौरवशाली दौर
रेडियो कार्यक्रम मन की बात की 138वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण का स्मरण कराया। अपने भाषण के शुरुआती पलों में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मंच का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों द्वारा किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों को सामने लाना और राष्ट्र की प्रमुख उपलब्धियों को साझा करना है। इसी कड़ी में उन्होंने देश की एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि की चर्चा की जिसके दस वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। यह उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा सीमा पार जाकर अंजाम दी गई सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़ी हुई है।
सितंबर महीने की 28 और 29 तारीख को साल 2016 में भारतीय सेना के पराक्रमी जवानों ने लाइन ऑफ कंट्रोल के पार स्थित आतंकवादी ठिकानों पर अचानक और सटीक हमला बोला था। उस समय जिस साहस और रणनीति के साथ सीमा पार जाकर आतंकवाद के गढ़ को तबाह किया गया था, उसने पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया था। इस एक कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि और आतंकवाद से निपटने की उसकी क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया था।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त और स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसने डंके की चोट पर पूरे विश्व के सामने भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति का एक नया और साहसिक खाका पेश किया। वर्षों से सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों के कारण देश ने जिस असहनीय पीड़ा और कष्ट को झेला था, यह कार्रवाई उसी का एक अत्यंत निर्णायक और कड़ा जवाब थी। इसने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आक्रामक रुख भी अपना सकता है।
समय बीतने के साथ भारत की इस नीति में और अधिक मजबूती देखने को मिली है। पिछले एक दशक की अवधि पर नजर डालें तो बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक से लेकर हालिया ऑपरेशन सिंदूर तक, देश ने बार-बार अपनी मंशा साफ की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि कोई भी आतंकी ताकत देश की अखंडता या सुरक्षा पर बुरी नीयत से नजर डालेगी, तो उसे उसी की भाषा में करारा और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
अतीत का दौर और सुरक्षा नीति में आया बदलाव
राष्ट्रीय सुरक्षा की वर्तमान स्थिति की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने अतीत के उन कठिन दिनों को याद किया जब देश के प्रमुख शहरों में सिलसिलेवार बम धमाके एक सामान्य घटना बन चुके थे। सितंबर 2008 का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि 13 सितंबर को राजधानी दिल्ली में हुए सिलसिलेवार धमाकों में कई मासूम नागरिकों ने अपनी जान गंवा दी थी। इसके कुछ ही हफ्तों बाद मुंबई पर 26/11 का भयानक हमला हुआ था जिसने पूरे राष्ट्र को झकझोर कर रख दिया था।
उन दिनों हर बड़े हमले के बाद पड़ोसी देश की नापाक हरकतों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग उठती थी। हालांकि, उस समय की व्यवस्था में उन मांगों पर त्वरित या कड़ा ध्यान देने के बजाय मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता था और केवल समय बीतने का इंतजार किया जाता था। इसके विपरीत, आज का नया भारत आतंकवाद के प्रति पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है। इस नीतिगत बदलाव के नतीजे आज धरातल पर साफ तौर पर देखे जा सकते हैं, जहां आतंकी नेटवर्क को व्यवस्थित तरीके से ध्वस्त किया जा रहा है।
वैश्विक आतंकवाद और सामूहिक संवेदना की भावना
अपने संबोधन में उन्होंने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के दंश को याद करते हुए अमेरिका में हुए 9/11 के आतंकी हमले का उल्लेख किया, जिसके हाल ही में 25 वर्ष पूरे हुए हैं। न्यूयार्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए उस भीषण हमले में अपनी जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों में अमेरिकी नागरिकों के बाद सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की थी।
साल 2014 में देश की बागडोर संभालने के बाद जब वे अमेरिका की यात्रा पर गए थे, तब वे विशेष रूप से न्यूयार्क में उस स्मारक पर पहुंचे थे जहां उन्होंने उन सभी निर्दोष मृत नागरिकों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी। इस ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने एक बार फिर भारत के करोड़ों लोगों की ओर से वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले में प्रभावित हुए परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त की।
