बिहार में गंगा और गंडक का रिकॉर्ड जलस्तर, बाढ़ से बिगड़े हालात के बीच अगले 48 घंटे के लिए अलर्ट जारी

बिहार में नदियों का उफान इस समय भयानक तबाही का संकेत दे रहा है। राज्य की प्रमुख नदियों गंगा, गंडक और सोन के जलस्तर ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पटना में प्रशासनिक अमले के साथ गंगा तटों का निरीक्षण किया गया और जमीनी हालात की समीक्षा की गई। बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच राज्य प्रशासन ने अगले 48 घंटों को बेहद नाजुक माना है और पूरे तंत्र को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। नदियों के जलस्तर में अभूतपूर्व वृद्धि से दर्जनों गांव और निचले इलाके जलमग्न हो चुके हैं।
नदियों के रिकॉर्ड स्तर से बढ़ी चिंता
इस बार की बाढ़ की स्थिति बेहद विचित्र और चौंकाने वाली है। राज्य में चालू मानसून सीजन के दौरान करीब 32 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, फिर भी नदियां अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर को पार कर गई हैं। कम बारिश के बावजूद इतना भयावह रूप देखना प्रशासन और मौसम विशेषज्ञों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। गंगा, गंडक और सोन नदियों का पानी जिस रफ्तार से रिहायशी इलाकों में दाखिल हो रहा है, उससे आने वाले दिनों में और बड़ा संकट खड़ा होने की आशंका गहरा गई है।
राहत कार्यों के लिए वायुसेना से मदद
बाढ़ के गंभीर संकट से निपटने के लिए अब भारतीय वायुसेना की मदद ली जा रही है। आपदा प्रबंधन टीमों के साथ-साथ वायुसेना के हेलीकॉप्टरों को भी राहत और बचाव अभियानों में तैनात करने की योजना है, ताकि दूर-दराज और पानी से घिरे इलाकों तक खाद्य सामग्री और जरूरी दवाइयां पहुंचाई जा सकें। प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने और लगातार गश्त करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। सरकार की पहली प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।
नेपाल और पड़ोसी राज्यों में बारिश का असर
बिहार में नदियों के इस उफान के पीछे का मुख्य कारण नेपाल और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भीषण बारिश है। वहां से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण गंडक नदी का जलस्तर गोपालगंज के डुमरियाघाट, सारण के रेवाघाट और वैशाली के लालगंज में ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर से काफी ऊपर पहुंच गया है। पिछले कई घंटों से नदियां रिकॉर्ड स्तर से ऊपर बह रही हैं, जिससे दोनों ओर बने सुरक्षा तटबंधों पर पानी का जबरदस्त दबाव बन गया है।
बैकफ्लो से बिगड़े जमीनी हालात
गंडक नदी में आ रहे अत्यधिक पानी के साथ-साथ गंगा नदी के भी उफान पर होने के कारण स्थिति और अधिक विकट हो गई है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर होने की वजह से गंडक नदी का पानी आसानी से आगे नहीं बढ़ पा रहा है और उसमें बैकफ्लो का भारी दबाव बन रहा है। इस उल्टे दबाव के कारण तटबंधों के निचले हिस्सों में सीपेज और पाइपिंग यानी पानी के रिसने की गंभीर समस्याएं सामने आने लगी हैं, जिन्हें रोकने के लिए तटबंधों पर दिन-रात सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं।
तटबंधों में दरार से गांवों में घुसा पानी
तमाम सुरक्षात्मक उपायों और रात-दिन की निगरानी के बावजूद कुछ इलाकों से तटबंध टूटने की खबरें सामने आई हैं। सारण जिले के पानापुर इलाके में मुख्य तटबंध में दरार आ गई, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया। इसी तरह मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज इलाके में भी एक रिंग बांध के टूटने से भारी तबाही हुई है। पानी के तेज बहाव ने लोगों के घरों और खेतों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे हजारों की आबादी अचानक बेघर होने की कगार पर पहुंच गई है।
गिरावट के बावजूद बना रहेगा खतरा
जल संसाधन विशेषज्ञों के अनुसार, यद्यपि ऊपरी इलाकों से पानी का दबाव धीरे-धीरे कम होने के संकेत मिले हैं और जलस्तर में मामूली गिरावट की प्रवृत्ति शुरू हुई है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। नदियां अब भी अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर से ऊपर बह रही हैं। कमजोर पड़ चुके तटबंधों पर अगले 48 घंटों तक भारी हाइड्रोलिक दबाव बना रहेगा। इसलिए जब तक पानी पूरी तरह से खतरे के निशान से नीचे नहीं आ जाता, तब तक हल्की सी लापरवाही भी भारी तबाही का कारण बन सकती है।
आगामी समय की चुनौतियां और रणनीति
बाढ़ प्रभावित इलाकों में महामारी फैलने और पीने के पानी की किल्लत जैसी नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। प्रशासन की ओर से राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है और नावों के जरिए लोगों को निकाला जा रहा है। आने वाले दो दिन बिहार के कई जिलों के लिए बेहद परीक्षा वाले होंगे। अगर स्थिति नियंत्रण में रहती है तो धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो सकेगा, लेकिन फिलहाल पूरी प्रशासनिक मशीनरी स्थिति को और बिगड़ने से रोकने में जुटी हुई है।
