यूपीएससी के शताब्दी समारोह में बोले पीएम मोदी, सरकारी पद नहीं जनसेवा से प्रेरित युवाओं की सिविल सेवाओं में है जरूरत

संघ लोक सेवा आयोग के सौ वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी नई दिल्ली में आयोजित भव्य शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था को नया दृष्टिकोण दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को ऐसे समर्पित युवाओं को लोक सेवाओं में आगे लाने की जरूरत है, जो केवल ऊंची लाल बत्ती वाली सरकारी कुर्सी या पद के आकर्षण में न आएं, बल्कि उनके भीतर देश के आम नागरिकों की सेवा करने का सच्चा जज्बा हो।
पारंपरिक मूल्यांकन व्यवस्था से आगे बढ़ने की जरूरत
आज के बदलते दौर में केवल किताबों से हासिल किए गए ज्ञान की परीक्षा लेना पर्याप्त नहीं है। प्रशासनिक सेवाओं के चयन में इस बात को गहराई से परखना सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है कि कोई भी युवा आखिर सिविल सेवाओं का हिस्सा क्यों बनना चाहता है। चयन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे अभ्यर्थी की सोच, उसकी नीयत और समाज के प्रति उसकी संवेदनशीलता का सही आकलन किया जा सके।
सौ साल की अटूट साख और भरोसे की यात्रा
संघ लोक सेवा आयोग ने पिछले एक दशक की अपनी लंबी यात्रा के दौरान देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान की है। एक सदी की इस गौरवशाली यात्रा में कई पीढ़ियां और सरकारें आईं और गईं, लेकिन इस संस्था की निष्पक्षता और साख पर देशवासियों का विश्वास आज भी उतना ही अटूट बना हुआ है। आयोग ने हर दौर में योग्य और निष्ठावान अधिकारियों का चयन करके देश की तरक्की में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विकसित भारत के निर्माण में प्रशासनिक चयन की भूमिका
इतिहास के पन्नों को पीछे छोड़ते हुए अब देश 21वीं सदी के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दो से तीन दशक भारत के स्वर्णिम भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। एक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए जिस दूरदर्शी और मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, उसे तैयार करने में संघ लोक सेवा आयोग और राज्यों के लोक सेवा आयोगों की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है।
तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नया युग
आज जिस रफ्तार से दुनिया भर में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा बढ़ रहा है, उसने काम करने के पुराने तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। जो दस्तावेजी काम पहले हफ्तों में होते थे, उन्हें आधुनिक तकनीक कुछ ही पलों में पूरा कर देती है। इस तेजी से बदलती कार्यप्रणाली के बीच हमारे सिविल सेवकों को भी नई सोच, नई कार्यसंस्कृति और तकनीकी दक्षता के साथ खुद को ढालना होगा ताकि वे आधुनिक समय की जटिल चुनौतियों का मुकाबला आसानी से कर सकें।
नागरिक देवो भव का मूल मंत्र और नया दृष्टिकोण
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में आज देश एक नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसका मूल मंत्र नागरिकों को सर्वोपरि मानना है। जब प्रशासनिक व्यवस्था में नागरिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, तभी जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। आने वाले समय में समाज के सामने कई तरह की नई और जटिल चुनौतियां होंगी, जिन्हें हल करने के लिए अधिकारियों को पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा।
ऐतिहासिक अवसर पर स्मारक सिक्के और डाक टिकट का विमोचन
आयोग के शताब्दी वर्ष के समापन के इस ऐतिहासिक मौके पर एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया गया। इसके साथ ही भारतीय प्रशासनिक सेवाओं और आयोग की नीतियों को नया आकार देने वाले सौ ऐतिहासिक कानूनी फैसलों पर आधारित एक विशेष पुस्तक का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक आने वाले समय में प्रशासनिक और कानूनी संदर्भों के लिए एक बेहद उपयोगी दस्तावेज साबित होगी।
साल भर चले समारोहों का भव्य समापन
वर्ष 1926 में स्थापित इस संवैधानिक संस्था के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पिछले एक साल से देश भर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा था। इन शताब्दी समारोहों की शुरुआत पिछले वर्ष की गई थी, जिसका समापन इस भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ हुआ। यह ऐतिहासिक पड़ाव आयोग के समृद्ध इतिहास का जश्न मनाने के साथ-साथ आने वाले सौ वर्षों के लिए एक नई और आधुनिक प्रशासनिक दृष्टि तय करने का भी प्रतीक है।
