एशियाई खेल भारत ने 85 पदकों के साथ रचा इतिहास, पीएम मोदी ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सराहा

भारतीय दल का शानदार प्रदर्शन और प्रधानमंत्री का संदेश
एशियाई खेल 2026 के औपचारिक समापन के साथ ही भारतीय खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। जापान के आइची-नागोया महाद्वीप में आयोजित इन खेलों में भारतीय दल ने अपने असाधारण कौशल, जुनून और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दल के प्रत्येक खिलाड़ी, कोच और सहयोगी स्टाफ की सराहना की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के इस बेहतरीन प्रदर्शन ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नई प्रेरणा स्थापित की है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विशेष रूप से रेखांकित किया कि खिलाड़ियों की यह सफलता केवल अंतरराष्ट्रीय मंच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत में जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारतीय एथलीट और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे। इस बार के खेलों में भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदकों के साथ कुल 85 पदक अपने नाम किए। पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहते हुए भारत ने एशियाई खेलों के इतिहास में अपना दूसरा सबसे बड़ा पदक संग्रह हासिल किया।
टीम इवेंट्स में भारत का दबदबा और ऐतिहासिक जीत
जापान में आयोजित इस महाद्वीपीय आयोजन में भारतीय टीम इवेंट्स का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। कई प्रतिस्पर्धाओं में भारतीय टीमों ने न केवल अपने पुराने खिताबों की रक्षा की, बल्कि नए कीर्तिमान भी स्थापित किए। पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने दबाव के क्षणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपने एशियाई खेलों के स्वर्ण पदकों को बरकरार रखा। इसी तरह कबड्डी के मैदान पर भी भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने अपना निर्विवाद वर्चस्व कायम रखते हुए देश की झोली में दो और स्वर्ण पदक डाले।
हॉकी के मैदान पर भी भारतीय खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिला। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने खिताबी मुकाबले में मलेशिया को 5-1 के विशाल अंतर से हराकर अपने खिताब का सफलता पूर्वक बचाव किया। वहीं दूसरी ओर, भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से मात देकर इतिहास रच दिया। महिला हॉकी टीम ने 44 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
व्यक्तिगत स्पर्धाओं में बेटियों ने लहराया परचम
इस बार के एशियाई खेलों की सबसे बड़ी खासियत व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारतीय महिला एथलीटों का ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा। कई खेलों में भारतीय महिलाओं ने पहली बार देश को स्वर्णिम सफलता दिलाई। गोल्फ के मैदान में प्रणवी उर्स ने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास बनाया। वे एशियाई खेलों के इतिहास में गोल्फ प्रतिस्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं।
तीरंदाजी में भी भारत की युवा प्रतिभा का डंका बजा। 17 वर्षीय कुमकुम मोहद ने व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर सभी को चौंका दिया। वे इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता के रिकर्व इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बनीं। मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन ने अपने अनुभव का परिचय देते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वे मैरी कॉम के बाद एशियाई खेलों में मुक्केबाजी का स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गईं।
एथलेटिक्स और शूटिंग में पदकों की बौछार
विभिन्न खेलों में भारत के कुल पदक तालिका को मजबूत करने में एथलेटिक्स, शूटिंग और तीरंदाजी का सबसे बड़ा योगदान रहा। एथलेटिक्स ट्रैक एंड फील्ड में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ते हुए सबसे अधिक 24 पदक जीते, जिनमें कई नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी शामिल हैं। निशानेबाजी यानी शूटिंग स्पर्धाओं में भी भारतीय शूटरों ने अपनी सटीक निशानेबाजी का लोहा मनवाया और कुल 15 पदक देश के नाम किए।
स्वर्ण पदकों की संख्या के मामले में तीरंदाजी भारत का सबसे सफल खेल साबित हुआ। भारतीय तीरंदाजों ने सटीक निशानों के बदौलत कुल पांच स्वर्ण पदक जीतकर भारत की स्थिति को पदक तालिका में बेहद मजबूत किया। इन बहुआयामी सफलताओं ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब पारंपरिक खेलों के साथ-साथ अन्य वैश्विक खेलों में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
