सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी बधाई,

केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक में मंगलवार को एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव के माध्यम से सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार 25 वर्षों का ऐतिहासिक कार्यकाल पूरा करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधिकारिक रूप से बधाई दी गई। यह प्रस्ताव केवल एक औपचारिक औचित्य या अभिनंदन पत्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र प्रथम और नागरिक प्रथम के सिद्धांतों पर आधारित उनके एक चौथाई सदी के जनसेवा और प्रशासनिक सफर का उत्सव मनाता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मिले तीन लगातार जनादेशों से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीन बार मिली जीत जनता के उनके प्रति अटूट विश्वास को दर्शाती है। इस विशेष प्रस्ताव में उनके इस लंबे सफर के 10 मुख्य स्तंभों को रेखांकित किया गया है।
गुजरात के प्रशासनिक मॉडल का राष्ट्रीय विस्तार
प्रधानमंत्री ने अपने प्रशासनिक अनुभव की शुरुआत गुजरात से की थी, जहाँ लागू की गई कई नवोन्मेषी योजनाओं ने बाद में राष्ट्रीय नीतियों का रूप लिया। गुजरात में जन शिकायतों के निवारण के लिए शुरू की गई स्वागत प्रणाली को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली, जिसने आगे चलकर केंद्र सरकार की प्रगति प्रणाली को प्रेरित किया। इसी प्रकार, ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति और कृषि के लिए अलग फीडर देने वाली ज्योतिग्राम योजना आगे चलकर देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मानक मॉडल बनी।
गरीब कल्याण और सामाजिक सम्मान का नया दौर
बीते वर्षों में जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से करोड़ों लोगों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आया है। देश में करीब 60 करोड़ जन धन बैंक खाते खोलकर अंतिम व्यक्ति को वित्तीय प्रणाली से जोड़ा गया। इसके साथ ही 4 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को पक्के मकान मुहैया कराए गए। इन कल्याणकारी प्रयासों के कारण लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलने में सफल रहे, जो यह साबित करता है कि जमीनी समस्याओं की समझ ने बड़े पैमाने पर नीतियां बनाने में मदद की।
महिला सशक्तिकरण और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच
देश के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के लिए महिलाओं, किसानों और वंचित वर्गों को केंद्र में रखा गया। लगभग साढ़े तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया। संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कराने से लेकर किसानों के खातों में 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान निधि हस्तांतरित करने तक, हर वर्ग का ध्यान रखा गया। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों और युवाओं के लिए कई दूरदर्शी योजनाएं लागू की गईं।
कड़े फैसले और व्यवस्थागत सुधारों की प्रतिबद्धता
प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कई ऐसे कठोर कदम उठाए गए, जिनमें राजनीतिक जोखिम शामिल था। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को लागू करना, कल्याणकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजना और दशकों पुराने औपनिवेशिक कानूनों को बदलना इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता अभियान, डिजिटल भुगतान प्रणाली और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपीलों ने आम नागरिकों को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष भागीदार बनाया।
आत्मनिर्भर भारत और मजबूत आर्थिक नीतियां
देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र पर अभूतपूर्व निवेश किया गया। सरकारी पूंजीगत खर्च को 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर पर पहुंचाया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने लंबी छलांग लगाई और इसका दायरा 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भारत की नई पहचान इसी दूरदर्शी आर्थिक नीति का नतीजा है।
तकनीक का लोकतंत्रीकरण और वैज्ञानिक उपलब्धियां
तकनीक को केवल शासन का साधन न बनाकर आम नागरिकों की सुविधा का माध्यम बनाया गया। जन धन, आधार और मोबाइल की त्रिमूर्ति के साथ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने देश के डिजिटल परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। वैश्विक महामारी के समय स्वदेशी टीकों का रिकॉर्ड समय में निर्माण और चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग ने देश की वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवाया। वर्तमान में एआई, क्वांटम तकनीक और बायोटेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
संकट के समय में मजबूत और स्थिर नेतृत्व
वैश्विक और घरेलू स्तर पर आई विभिन्न विषम परिस्थितियों में देश को मजबूती से संभाला गया। कोविड-19 महामारी के अभूतपूर्व संकट के समय 140 करोड़ देशवासियों को एकजुट रखते हुए विशाल स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी ईंधन और ऊर्जा संकट के बावजूद देश के आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा की गई।
राष्ट्रीय सुरक्षा और निर्णायक नीतियां
सुरक्षा के मोर्चे पर देश ने अपनी नीतियों में स्पष्ट बदलाव दिखाया है और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। साल 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 में संचालित ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना, वन रैंक वन पेंशन योजना को लागू करना और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का गठन करना सैन्य सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता कद
अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के क्षेत्र में भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एजेंडा तय करने वाला देश बन चुका है। जी20 और ब्रिक्स जैसे वैश्विक मंचों पर सर्वसम्मति बनाने से लेकर अफ्रीकी संघ को जी20 का स्थायी सदस्य बनाने तक, भारत ने ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज के रूप में काम किया। इसके अलावा, वैश्विक संकट के दौरान विभिन्न देशों को दवाएं और टीके उपलब्ध कराने वाली ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल ने भारत की वैश्विक छवि को और मजबूत किया।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी
विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण पर भी समान ध्यान दिया गया। नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विस्तार और वैश्विक स्तर पर योग व मोटे अनाज (मिलेट्स) को पहचान दिलाने के साथ-साथ काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास और राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा जैसे आयोजनों ने सांस्कृतिक आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयां दीं। यह पूरा 25 वर्षों का सफर 2047 तक भारत को एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के अटूट संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
