विधानसभा और लोकसभा उपचुनाव मतगणना: तमिलनाडु, बंगाल, पुडुचेरी और असम में वोटों की गिनती जारी

देश के प्रमुख राज्यों में खाली पड़ी विधानसभा और लोकसभा सीटों के लिए हुए उपचुनावों के नतीजों का समय आ गया है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी की विधानसभा सीटों और असम की एक अहम लोकसभा सीट पर पड़े वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। सुबह से ही मतगणना केंद्रों के बाहर समर्थकों की भीड़ जमा होने लगी है और प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इन नतीजों से न केवल चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा, बल्कि संबंधित राज्यों के सियासी समीकरणों पर भी गहरा असर देखने को मिलेगा। चुनावी रणनीतिकारों और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें खास तौर पर इन उपचुनावों के नतीजों पर टिकी हुई हैं।
तमिलनाडु में दो आरक्षित सीटों पर सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती के साथ प्रक्रिया की शुरुआत की गई है। मदुरंतकम और धारापुरम ये दोनों ही सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं और इन पर पिछले दिनों वोट डाले गए थे। मतगणना केंद्रों पर सुबह से ही त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से निपटा जा सके। सत्ताधारी दल और प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने इन सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था। स्टार प्रचारकों और पार्टी के शीर्ष नेताओं ने रैलियों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राज्य स्तरीय राजनीतिक विमर्श को भी भुनाने की कोशिश की थी।
तमिलनाडु के इस चुनावी मुकाबले में नए और क्षेत्रीय दलों की साख भी दांव पर लगी हुई है। इन उपचुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि राज्य में जमीनी स्तर पर जनता का रुझान किस ओर मुड़ रहा है। मतगणना केंद्रों के अंदर अधिकारियों की मौजूदगी में सबसे पहले पोस्टल बैलेट गिने जा रहे हैं और इसके तुरंत बाद ईवीएम मशीनों के सील लिफाफे खोले जाएंगे। हर राउंड के बाद आने वाले आंकड़े उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि इन सीटों के परिणाम आने वाले मुख्य विधानसभा चुनावों के लिए भी एक तरह का दिशा-निर्देश साबित हो सकते हैं।
पूर्वी भारत के राज्य पश्चिम बंगाल में उपचुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। राज्य की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के बाद आज मतगणना हो रही है। पूर्वी मिदनापुर की नंदीग्राम सीट पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी की उम्मीदवार द्वारा ऐन मौके पर अपना पर्चा वापस लेने के बाद मुकाबला बेहद दिलचस्प और एकतरफा होने के आसार बन गए हैं। इस अचानक हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने प्रतिद्वंद्वी खेमे को बड़ी बढ़त दिलाने का काम किया है।
नंदीग्राम में हुए इस घटनाक्रम के पीछे के राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों की चर्चा बंगाल की गलियों में काफी जोरों पर है। स्थानीय स्तर पर हुई हिंसक घटनाओं और राजनीतिक खींचतान के बीच नंदीग्राम का यह चुनाव राज्य की भावी राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। विपक्षी खेमे के दिग्गज नेता इस सीट पर बड़े अंतर से जीत का दावा कर रहे हैं। रेजीनगर सीट पर भी कड़े सुरक्षा घेरे में मतगणना जारी है, जहां मुकाबला काफी कड़ा देखा जा रहा है। दोनों सीटों के नतीजे बंगाल के सियासी माहौल में नई गरमाहट ला सकते हैं।
दक्षिण भारत के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी और पूर्वोत्तर के राज्य असम में भी चुनावी मतों की गणना सुचारू रूप से चल रही है। पुडुचेरी की थट्टानचावडी विधानसभा सीट पर हुए मतदान के परिणाम आज साफ हो जाएंगे। यहां के मतदाता किस पार्टी के वादों पर भरोसा जताते हैं, इसका फैसला कुछ ही घंटों में सामने आ जाएगा। वहीं असम की नागांव लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
असम की इस एकमात्र लोकसभा सीट पर जीत हासिल करने के लिए सभी प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। संसदीय सीट होने के कारण यहां मतदाताओं की संख्या अधिक है, इसलिए मतगणना के कई दौर पूरे होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। चुनावी मैदान में उतरे सभी उम्मीदवार मतगणना केंद्रों के बाहर अपने प्रतिनिधियों के जरिए हर राउंड की अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं। इन सीटों पर मिलने वाली जीत या हार का सीधा प्रभाव आने वाले समय में पार्टियों के रणनीतिक फैसलों पर पड़ेगा।
जैसे-जैसे दिन ढलता जाएगा, वैसे-वैसे मतगणना के नए दौर के आंकड़े सामने आते रहेंगे। शुरुआती रुझानों के बाद अब अंतिम परिणामों की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगी है। सभी संबंधित राज्यों के चुनाव आयोग ने मतगणना को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा कराने के लिए व्यापक व्यवस्था की है। नतीजे घोषित होते ही जीतने वाले उम्मीदवारों के समर्थकों में जश्न का माहौल शुरू हो जाएगा। इन परिणामों का असर राज्यों की क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
