दिवाली तक दिल्ली के प्रमुख बाजारों में धरने-प्रदर्शनों पर लगे रोक: व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र

देश की राजधानी दिल्ली के व्यापारी वर्ग ने आगामी त्यौहारी सीजन को देखते हुए एक बड़ी मांग उठाई है। व्यापारिक संगठनों ने देश के शीर्ष नेतृत्व को पत्र भेजकर यह गुहार लगाई है कि नवरात्रि से लेकर दिवाली तक मध्य दिल्ली और मुख्य कमर्शियल इलाकों में बड़े धरने-प्रदर्शनों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। व्यापारियों का कहना है कि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों, रास्तों की नाकाबंदी और सुरक्षा कारणों से बंद होने वाले मेट्रो स्टेशनों की वजह से मुख्य बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
त्यौहारों का समय दिल्ली के लाखों छोटे और बड़े कारोबारियों के लिए साल का सबसे कमाई वाला वक्त होता है। नवरात्रि, रामलीला, धनतेरस, दिवाली और उसके बाद शुरू होने वाले शादी-ब्याह के सीजन पर पूरे साल का व्यापार निर्भर करता है। ऐसे समय में जब राजधानी के कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, संसद मार्ग और लुटियंस दिल्ली के आसपास बार-बार सड़कें बंद होती हैं, तो आम खरीदार इन इलाकों में आने से कतराने लगते हैं। इसका सीधा नुकसान उन दुकानदारों को उठाना पड़ता है जिन्होंने त्यौहारों के लिए महीनों पहले से स्टॉक जमा कर रखा होता है।
व्यापारिक प्रतिनिधियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से जारी प्रदर्शनों और सुरक्षा पाबंदियों के कारण दिल्ली के प्रमुख बाजारों में ग्राहकों की फुटफॉल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एक हालिया सर्वे और बाजार के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मध्य दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही में सत्तर प्रतिशत तक की कमी आई है। आम तौर पर बाहरी राज्यों और आसपास के शहरों से दिल्ली के थोक व खुदरा बाजारों में रोजाना दो से तीन लाख लोग खरीदारी करने पहुंचते थे, जिनकी संख्या अब घटकर महज पचास हजार के आसपास रह गई है।
सड़कें बंद होने और ट्रैफिक में घंटों फंसे रहने के डर से लोग बाजारों में जाने के बजाय अन्य विकल्पों की तलाश करने लगते हैं। इसके अलावा कई बार सुरक्षा कारणों से भीड़भाड़ वाले मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थाई रूप से बंद कर दिए जाते हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट ठप होने या बाधित होने की स्थिति में आम जनता के लिए खरीदारी करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि वे नागरिकों के लोकतांत्रिक विरोध जताने के अधिकार का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन इसका खामियाजा निर्दोष कारोबारियों और आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए।
अपनी मांग में व्यापारी वर्ग ने प्रशासनिक स्तर पर कुछ ठोस और व्यावहारिक समाधान भी पेश किए हैं। उनका कहना है कि जंतर-मंतर या मध्य दिल्ली के प्रमुख स्थानों पर एक हजार से अधिक लोगों के जमावड़े वाले प्रदर्शनों की अनुमति देने से पहले उसके व्यावसायिक असर का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इसके अलावा, मध्य दिल्ली के व्यस्त बाजारों के बजाय प्रदर्शनकारियों के लिए बाहरी दिल्ली के किसी बड़े खुले मैदान जैसे बुराड़ी या रामलीला मैदान में एक स्थाई विरोध स्थल तय कर दिया जाना चाहिए ताकि मुख्य शहर की रफ्तार न थमे।
दिल्ली के करीब पंद्रह लाख छोटे और बड़े व्यापारी इस समय त्यौहारों के कारोबार को लेकर बेहद चिंतित हैं। दुकानदारों का कहना है कि अगर त्यौहारों के दौरान भी इसी तरह आए दिन रास्ते बंद रहे और प्रदर्शन होते रहे, तो उन्हें आर्थिक रूप से भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। व्यापारियों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस उनकी चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और आने वाले हफ्तों में बाजारों के आसपास शांति व सुचारू यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाएगी।
जैसे-जैसे नवरात्रि और दिवाली की तारीखें नजदीक आ रही हैं, बाजारों में खरीदारों की रौनक लौटना बेहद जरूरी माना जा रहा है। अगर समय रहते प्रदर्शनों के लिए वैकल्पिक रास्ते और अलग स्थल निर्धारित नहीं किए गए, तो दिल्ली के आर्थिक पहिये पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अब देखना होगा कि प्रशासन व्यापारियों की इस अपील पर क्या ठोस कदम उठाता है।
