वर्ल्डस्किल्स 2026 में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन: पीएम मोदी ने शंघाई में पदक जीतने वाले युवाओं को दी बधाई

अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के युवाओं की प्रतिभा का डंका लगातार बज रहा है। हाल ही में वैश्विक स्तर पर आयोजित कौशल प्रतियोगिता में देश के युवा हुनरमंदों ने अपने अभूतपूर्व प्रदर्शन से इतिहास रच दिया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने वाले प्रतिभागियों का स्वागत करने के लिए खुद देश के शीर्ष नेतृत्व ने पहल की। राजधानी नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर प्रधानमंत्री ने इन प्रतिभावान युवाओं की पूरी टीम का स्वागत किया और उनकी इस अभूतपूर्व सफलता पर व्यक्तिगत रूप से बधाई दी।
इस खास मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले एक-एक युवा से उनके अनुभवों के बारे में विस्तार से बातचीत की। उन्होंने युवाओं से उनके प्रोजेक्ट्स, तैयारी के दौरान आने वाली चुनौतियों और वैश्विक मंच पर अन्य देशों के प्रतिस्पर्धियों के साथ हुए अनुभवों को गहराई से समझा। देश के प्रमुख ने युवाओं के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन को राष्ट्रीय गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं का यह प्रदर्शन देश में बढ़ रही तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक कौशल की दिशा में एक बहुत बड़ा प्रमाण है।
ग्लोबल लेवल पर आयोजित इस स्किल ओलंपियाड में भारत का यह अब तक का सबसे श्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। भारतीय दल ने कठिन वैश्विक स्पर्धाओं के बीच कुल छह रजत पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही विभिन्न तकनीकी और व्यावहारिक श्रेणियों में असाधारण दक्षता प्रदर्शित करने के लिए भारतीय प्रतिभागियों को बीस एक्सीलेंस मेडल यानी उत्कृष्टता के पदक भी प्रदान किए गए। इन सफलताओं के दम पर भारत ने पहली बार इस प्रतियोगिता की समग्र रैंकिंग में दुनिया के शीर्ष दस देशों में अपनी जगह बनाई है, जो देश के कौशल विकास क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
इस अंतर्राष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता का आयोजन चीन के प्रमुख शहर शंघाई में किया गया था। इस वैश्विक स्पर्धा में दुनिया के दर्जनों देशों से आए हजारों युवाओं ने अपनी-अपनी विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, डिजिटल डिजाइनिंग, वेल्डिंग, कुकरी और ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी जैसी कई कठिन श्रेणियों में भारतीय दल ने कड़ी टक्कर दी। शंघाई में मिली इस बड़ी कामयाबी ने यह साबित कर दिया है कि भारत का युवा वर्ग न केवल पारंपरिक शिक्षा में बल्कि आधुनिक और व्यावहारिक कौशलों में भी दुनिया के किसी भी देश से पीछे नहीं है।
भारत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे देश में चलाए जा रहे व्यापक कौशल विकास कार्यक्रमों और प्रशिक्षण संस्थानों की कड़ी मेहनत शामिल है। पिछले कुछ वर्षों में युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप दी गई ट्रेनिंग का ही नतीजा है कि भारतीय प्रतिभागियों ने इतने बड़े वैश्विक मंच पर अपनी श्रेष्ठता साबित की। शंघाई में पदक जीतने वाले इन युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सख्त चयन प्रक्रियाओं और लंबे अभ्यास दौर से गुजरना पड़ा था।
प्रधानमंत्री आवास पर हुई यह मुलाकात देश के करोड़ों अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। इस तरह का प्रत्यक्ष प्रोत्साहन और सम्मान देश में वोकेशनल ट्रेनिंग यानी व्यावसायिक शिक्षा के प्रति युवाओं का नजरिया बदलने में मदद करेगा। अब युवा केवल कागजी डिग्रियों के पीछे भागने के बजाय व्यावहारिक कौशल सीखने में रुचि दिखा रहे हैं। जब देश के शीर्ष स्तर से स्किल डेवलपमेंट को इतना मान-सम्मान मिलता है, तो इससे समाज में हुनरमंद कारीगरों और तकनीशियनों के प्रति सम्मान और बढ़ता है।
शंघाई से मिली यह ऐतिहासिक जीत भारत के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी। वैश्विक स्तर पर शीर्ष दस में जगह बनाने से अब विदेशी कंपनियां भी भारतीय कौशल और श्रमबल पर पहले से अधिक भरोसा जताएंगी। भारत जिस तेजी से खुद को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब के रूप में स्थापित कर रहा है, उसमें इन हुनरमंद युवाओं की भूमिका आने वाले समय में बेहद निर्णायक साबित होगी।
आने वाले वर्षों में भारत इस प्रतियोगिता में और भी बेहतर प्रदर्शन करने के उद्देश्य से अपनी तैयारियों को और मजबूत करने जा रहा है। सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर युवाओं को उन्नत तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के उपकरणों पर अभ्यास कराने की योजना बना रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि अगले वर्ल्डस्किल्स टूर्नामेंट में भारतीय टीम स्वर्ण पदकों की संख्या में भी बड़ा इजाफा करेगी और वैश्विक रैंकिंग में और ऊपर पहुंचेगी।
