दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के चलते राजीव चौक और नई दिल्ली समेत कई बड़े स्टेशनों पर आवाजाही ठप

राजधानी दिल्ली में यात्रा करने वाले लाखों दैनिक यात्रियों के लिए एक बेहद महत्त्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य खबर सामने आई है। राष्ट्रीय राजधानी में प्रस्तावित एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल नेटवर्क के दर्जनों प्रमुख स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को बंद करने का फैसला लिया गया है। इस फैसले का सीधा असर मध्य, उत्तरी और दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन की सिफारिश के बाद उठाए गए इस कदम से वीकेंड पर घर से बाहर निकलने वाले लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जंतर-मंतर पर होने वाले इस बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है। ऐतिहासिक रूप से जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली का इलाका संवेदनशील माना जाता है, जहाँ किसी भी बड़े जमावड़े से अव्यवस्था फैलने का खतरा रहता है। प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने और शहर के मुख्य इलाकों में यातायात को सुचारू रखने के लिए मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन को अंदेशा है कि प्रदर्शनकारी सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेकर संवेदनशील स्थलों तक पहुँच सकते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में चूक हो सकती है।
मेट्रो नेटवर्क के अंतर्गत आने वाले राजीव चौक, नई दिल्ली, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक और कश्मीरी गेट जैसे अत्यंत व्यस्त और महत्त्वपूर्ण स्टेशनों के प्रवेश व निकास द्वार बंद रखे जा रहे हैं। ये वे स्टेशन हैं जहाँ से रोजाना लाखों लोग अपना सफर शुरू करते हैं या अपनी ट्रेन बदलते हैं। इन मुख्य स्टेशनों के अलावा जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, इंद्रप्रस्थ, आईटीओ, दिल्ली गेट, खान मार्केट, जामा मस्जिद, चांदनी चौक, हौज खास और आईएनए जैसे व्यस्त व्यावसायिक और दर्शनीय स्थलों के निकट स्थित स्टेशनों पर भी यात्रियों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।
दक्षिण और पूर्वी दिल्ली को जोड़ने वाले कई अन्य महत्त्वपूर्ण इलाकों में भी सुरक्षा के लिहाज से गेट बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें शाहीन बाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, ओखला विहार, कालिंदी कुंज, लाजपत नगर, आश्रम, सराय काले खां-निजामुद्दीन, वेलकम, शाहदरा, रिठाला, रोहिणी, आजादपुर, जंगपुरा और शिवाजी स्टेडियम जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर स्टेशनों के दरवाजे बंद होने से उन लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा जो रोजाना नौकरी, कारोबार या जरूरी काम से इन इलाकों में आते-जाते हैं।
यात्रियों को थोड़ी राहत देने के लिए प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर ट्रेन बदलने यानी इंटरचेंज की सुविधा चालू रखी जाएगी। इसका मतलब है कि यदि किसी यात्री को एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाना है, तो वह स्टेशन के अंदर रहकर अपनी ट्रेन बदल सकता है। हालाँकि, इस पूरी व्यवस्था के बीच एक बड़ा अपवाद नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन रहेगा। नई दिल्ली स्टेशन पर न तो यात्रियों को प्रवेश मिलेगा, न ही बाहर निकलने दिया जाएगा और न ही यहाँ ट्रेन बदलने की सुविधा उपलब्ध होगी। इसलिए रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को पहले से ही वैकल्पिक रास्तों की योजना बनानी होगी।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की संभावित अनियंत्रित आवाजाही को रोकने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि मेट्रो सेवाओं पर आंशिक रूप से पाबंदी न लगाई जाती, तो हजारों की संख्या में लोग जंतर-मंतर और आसपास के वीआईपी इलाकों में जमा हो सकते थे, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी। परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यकता पड़ने पर संबंधित रूटों पर ट्रेनों के फेरे यानी फ्रीक्वेंसी कम करने का विकल्प भी खुला रखा गया है, ताकि स्टेशनों पर अनचाही भीड़ न जमा हो।
दिल्ली में जब भी इस प्रकार के बड़े राजनीतिक या सामाजिक प्रदर्शन होते हैं, तो सार्वजनिक परिवहन पर उसका सबसे पहला असर देखने को मिलता है। आम नागरिकों और यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए केवल मेट्रो पर निर्भर न रहें और अपनी यात्रा शुरू करने से पहले वैकल्पिक साधनों जैसे बस, ऑटो या निजी वाहनों के इस्तेमाल पर विचार कर लें। सुरक्षा व्यवस्था सामान्य होते ही इन सभी पाबंदियों को हटा लिया जाएगा और मेट्रो का परिचालन पहले की तरह सामान्य रूप से बहाल कर दिया जाएगा।
