दशहरा 2026: भारत ही नहीं, इन देशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है विजयादशमी का त्योहार

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भारत की सभ्यता और संस्कृति सदियों पुरानी है। यहां मनाए जाने वाले त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये देश की परंपराओं, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की भी पहचान हैं। भारतीय त्योहारों की लोकप्रियता अब देश की सीमाओं से बाहर भी पहुंच चुकी है। दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय अपने पारंपरिक त्योहारों को पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। नवरात्रि और दशहरा भी ऐसे ही त्योहार हैं, जिनकी रौनक विदेशों में देखने को मिलती है।

हाल ही में अमेरिका के मशहूर टाइम्स स्क्वायर पर गरबा करते लोगों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आया। भारतीय संगीत की धुनों पर लोगों को थिरकते देखकर एक बार फिर यह साफ हुआ कि भारतीय संस्कृति का आकर्षण दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ रहा है। ऐसे में दशहरा भी केवल भारत तक सीमित नहीं है। नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और अमेरिका समेत कई देशों में रहने वाले हिंदू और भारतीय मूल के लोग इस पर्व को अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाते हैं।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। भारत के कई हिस्सों में यह त्योहार भगवान श्रीराम की रावण पर विजय की याद में मनाया जाता है। इस अवसर पर रामलीला का मंचन किया जाता है और रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के पुतलों का दहन होता है।

वहीं, देश के कई अन्य हिस्सों में दशहरा मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जुड़ा हुआ है। नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा करने के बाद दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। इस तरह दशहरा भारतीय धार्मिक परंपराओं में शक्ति, साहस, न्याय और सकारात्मकता का संदेश देने वाला पर्व है।

नेपाल में बड़े उत्साह से मनाया जाता है दशहरा

नेपाल में दशहरे को दशैं या बड़ा दशैं कहा जाता है। यह देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों में शामिल है। नेपाल में दशैं का उत्सव कई दिनों तक चलता है और परिवारों के एक साथ आने का विशेष अवसर माना जाता है।

इस पर्व के दौरान देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। घरों और मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। त्योहार के महत्वपूर्ण दिनों में परिवार के बड़े-बुजुर्ग बच्चों और छोटे सदस्यों के माथे पर टीका लगाकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं। इसके साथ ही जमरा यानी जौ या अन्य अनाज के अंकुर देकर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।

दशैं के दौरान लोग दूर-दराज के शहरों से अपने घर लौटते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं। बाजारों में भी रौनक बढ़ जाती है। नेपाल में दशहरे की परंपराएं भारतीय उपमहाद्वीप की साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा और विजयादशमी की धूम

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लिए दुर्गा पूजा सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक है। नवरात्रि के दौरान विभिन्न शहरों और कस्बों में पूजा मंडप सजाए जाते हैं। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को आकर्षक ढंग से सजाकर पूजा-अर्चना की जाती है। विजयादशमी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ कई स्थानों पर प्रतिमा विसर्जन भी किया जाता है।

राजधानी ढाका सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। रमना काली मंदिर, सिद्धेश्वरी काली मंदिर और ढाका विश्वविद्यालय के जगन्नाथ हॉल जैसे स्थानों पर धार्मिक गतिविधियां आयोजित होती हैं।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदू समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकजुटता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूजा पंडालों की सजावट, पारंपरिक संगीत, प्रसाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस उत्सव को खास बनाते हैं।

श्रीलंका में भी मनाई जाती है विजयादशमी

श्रीलंका में हिंदू समुदाय, विशेषकर तमिल हिंदू, नवरात्रि और विजयादशमी को धार्मिक आस्था के साथ मनाते हैं। इस दौरान मंदिरों में विशेष पूजा, भजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। कुछ स्थानों पर रामायण से संबंधित कार्यक्रम भी होते हैं।

हालांकि, श्रीलंका में दशहरे का स्वरूप भारत के उत्तर भारतीय क्षेत्रों से अलग है। यहां हर जगह बड़े स्तर पर रावण दहन की परंपरा देखने को नहीं मिलती। त्योहार मनाने का तरीका स्थानीय रीति-रिवाजों और समुदाय की परंपराओं पर निर्भर करता है।

श्रीलंका में हिंदू मंदिरों की धार्मिक गतिविधियां नवरात्रि के दौरान विशेष महत्व रखती हैं। विजयादशमी को कई लोग नई शुरुआत, ज्ञान प्राप्ति और शुभ कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण मानते हैं। इस तरह यह त्योहार वहां रहने वाले हिंदू समुदाय को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़े रखता है।

अमेरिका में भारतीय समुदाय के बीच दशहरे की रौनक

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है। यही वजह है कि वहां कई शहरों में दशहरा, नवरात्रि और दुर्गा पूजा जैसे त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं। कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी, टेक्सास, इलिनोइस, जॉर्जिया, मिशिगन और फ्लोरिडा जैसे राज्यों में भारतीय समुदाय के विभिन्न संगठन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

इन कार्यक्रमों में पारंपरिक पूजा, रामलीला, संगीत, नृत्य और सामुदायिक भोज जैसे आयोजन शामिल हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर रावण दहन भी किया जाता है, जबकि अन्य जगहों पर धार्मिक सभाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से विजयादशमी मनाई जाती है।

विदेश में जन्म लेने वाले भारतीय मूल के बच्चों और युवाओं के लिए ऐसे आयोजन अपनी जड़ों को समझने का अवसर होते हैं। माता-पिता और बुजुर्ग उन्हें रामायण की कहानियों, दशहरे के महत्व और भारतीय परंपराओं के बारे में बताते हैं। इस तरह त्योहार नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

विदेशों में कैसे मनाया जाता है दशहरा?

दशहरा मनाने का तरीका हर देश और समुदाय में एक जैसा नहीं है। जिन स्थानों पर रामलीला की परंपरा लोकप्रिय है, वहां भगवान राम की कथा का मंचन किया जाता है। कुछ जगहों पर रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीकात्मक संदेश दिया जाता है।

बंगाली और कई अन्य हिंदू समुदायों में नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा की जाती है और विजयादशमी पर प्रतिमा विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है। वहीं, कुछ समुदाय मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं करते हैं और परिवार तथा मित्रों के साथ त्योहार मनाते हैं।

विदेशों में आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रमों में स्थानीय संस्कृति और भारतीय परंपराओं का मेल भी दिखाई देता है। हालांकि, हर आयोजन का स्वरूप अलग हो सकता है और सभी देशों में रावण दहन या सार्वजनिक उत्सव आयोजित होना जरूरी नहीं है।

दशहरे का संदेश दुनिया भर में क्यों है खास?

दशहरा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में सही रास्ता चुनने और बुराई के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा भी देता है। भगवान राम की विजय और मां दुर्गा की शक्ति से जुड़ी परंपराएं लोगों को साहस, संयम, न्याय और सत्य के महत्व की याद दिलाती हैं।

नेपाल से लेकर अमेरिका तक, अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय और हिंदू समुदाय अपनी मान्यताओं के अनुसार इस पर्व को मनाते हैं। कहीं पारिवारिक परंपराएं प्रमुख होती हैं, तो कहीं रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक पूजा आकर्षण का केंद्र बनते हैं।

दुनिया भर में दशहरे का आयोजन यह दिखाता है कि संस्कृति और परंपराएं भौगोलिक सीमाओं से बंधी नहीं रहतीं। समय और स्थान बदलने के बावजूद त्योहारों से जुड़ी आस्था लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखती है। विजयादशमी का सबसे बड़ा संदेश भी यही है कि सत्य और अच्छाई के रास्ते पर चलने का महत्व हर समाज और हर दौर में बना रहता है।

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