अमृत महोत्सव में PM मोदी का संबोधन, 2047 तक विकसित भारत बनाने का किया आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक ऐसा विचार है, जो भारतीय दर्शन, ज्ञान और चेतना को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने मिशन से जुड़े संतों, आचार्यों, साधकों और अनुयायियों को अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
चिन्मय मिशन एक विचार और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन की दशकों लंबी यात्रा अनेक संकल्पों और प्रयासों से भरी रही है। उन्होंने ‘चिन्मय’ शब्द का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें ज्ञान, चेतना और अमरता का भाव समाहित है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ज्ञान और बोध को ऐसा आधार माना गया है, जो पीढ़ियों तक समाज का मार्गदर्शन करता है।
उन्होंने मिशन से जुड़े लोगों से इस विरासत को आगे बढ़ाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम करने की अपील की। प्रधानमंत्री के अनुसार, आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे समाज को दिशा देने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में भी योगदान दे सकती हैं।
स्वामी चिन्मयानंद के साथ मुलाकात को किया याद
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई मुलाकात की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के होलोबॉट से संवाद करना उनके लिए भावुक अनुभव था। इससे वर्ष 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात और बातचीत की यादें ताजा हो गईं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुदेव का स्नेह और आशीर्वाद आज भी उनके साथ है। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी अंतिम मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय युवाओं के निर्माण और उनके माध्यम से सशक्त भारत बनाने पर गंभीर चर्चा हुई थी।
युवाशक्ति को सशक्त बनाने पर था स्वामी चिन्मयानंद का जोर
पीएम मोदी ने बताया कि वर्ष 1993 में उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद को अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुआ था। हालांकि, समारोह से पहले स्वामी चिन्मयानंद का निधन हो गया और प्रधानमंत्री को कार्यक्रम के दौरान उनकी कमी महसूस हुई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं की क्षमता को पहचानना और उन्हें सही दिशा देना राष्ट्र निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने चिन्मय अमृत महोत्सव से जुड़े युवाओं के प्रयासों की सराहना की। उनके अनुसार, मिशन के युवा कार्यकर्ता लगभग 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं और इस दौरान एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क स्थापित किया गया है।
भारतीय संस्कृति की पहचान हजारों वर्षों से कायम
प्रधानमंत्री ने उपनिषदों के कथन ‘वयम् अमृतस्य पुत्राः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका अर्थ है कि हम अमृत की संतान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका आशय शरीर की अमरता से नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और आध्यात्मिक बोध की निरंतरता से है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों से अपनी पहचान बनाए हुए है, क्योंकि इसकी जड़ें गहरे आध्यात्मिक विचारों और मानव कल्याण की भावना में हैं। भारत की ज्ञान परंपरा ने जीवन, समाज और प्रकृति को समझने के लिए व्यापक दृष्टिकोण दिया है। इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अमृत महोत्सव से विकसित भारत के संकल्प को मजबूती
प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अमृत महोत्सव को विकसित भारत के निर्माण की प्रेरणा से जोड़ने का प्रयास किया गया था। इसका उद्देश्य देश की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और समाज कल्याण की परंपरा को नई ऊर्जा देना था।
उन्होंने कहा कि कई आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन अपने महत्वपूर्ण पड़ावों पर नए संकल्पों के साथ इस अभियान से जुड़े हैं। चिन्मय मिशन का अमृत महोत्सव भी इसी दिशा में योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी क्षमताओं और अनुभवों का उपयोग देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए करें।
गीता ज्ञान यज्ञ से आम लोगों तक पहुंचा वेदांत का ज्ञान
पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने गीता ज्ञान यज्ञ के माध्यम से उपनिषदों, वेदांत और भारतीय शास्त्रों के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। उनका उद्देश्य भारतीय दर्शन को सरल रूप में प्रस्तुत करना और लोगों को जीवन के व्यावहारिक प्रश्नों से जोड़ना था।
प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के जीवन को ज्ञान, कर्म और भक्ति का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने कहा कि उनके विचारों और वाणी ने अनेक लोगों को प्रेरित किया। उनके रेडियो कार्यक्रम ‘आर्ट ऑफ मैन मेकिंग’ ने भी लोगों को व्यक्तित्व निर्माण और जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में मार्गदर्शन दिया।
शिक्षा और संस्कारों के मेल पर प्रधानमंत्री का जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन के 100 से अधिक शिक्षण संस्थान बच्चों और युवाओं के भविष्य को संवारने में योगदान दे रहे हैं। इन संस्थानों में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कारों पर भी ध्यान दिया जाता है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और नई तकनीक को महत्व दिया गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर ही नई पीढ़ी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
भारतीय विरासत और सांस्कृतिक केंद्रों का पुनर्जागरण
पीएम मोदी ने विवेकानंद रॉक मेमोरियल के निर्माण में स्वामी चिन्मयानंद के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एकनाथ रानाडे के नेतृत्व में शुरू हुए इस प्रयास में स्वामी चिन्मयानंद ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया था। आज यह स्मारक देश-विदेश से आने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र है।
प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के राम मंदिर, उज्जैन के महाकाल महालोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों का पुनर्जागरण हो रहा है। उन्होंने प्राचीन मूर्तियों की वापसी का भी जिक्र किया और कहा कि पिछले 12 वर्षों में विदेशों से 650 से अधिक चोरी की गई प्राचीन मूर्तियां वापस लाई गई हैं।
विकसित भारत 2047 के लिए एकजुट हो समाज
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने भारतीय परंपरा को वैश्विक समुदाय से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने अपनी विरासत पर गर्व करने और गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने को आत्मविश्वास से भरे भारत की पहचान बताया।
उन्होंने समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से हर नागरिक को जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग-अलग संस्थाओं के उद्देश्य भले ही अलग हों, लेकिन राष्ट्र का विकास और गौरव सभी को एक सूत्र में जोड़ सकता है।
2047 में विकसित भारत और चिन्मय मिशन की शताब्दी यात्रा
पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2047 में भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा। इसी अवधि में चिन्मय मिशन भी अपनी शताब्दी की यात्रा की ओर बढ़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मिशन के संत, आचार्य, साधक और कार्यकर्ता अपनी आध्यात्मिक विरासत, अनुभव और वैश्विक नेटवर्क के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
प्रधानमंत्री ने अंत में स्वामी चिन्मयानंद को नमन करते हुए चिन्मय मिशन से जुड़े सभी लोगों को अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। उनका संदेश था कि भारतीय संस्कृति, युवाशक्ति, शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान को साथ लेकर आगे बढ़ना विकसित भारत के संकल्प को मजबूत कर सकता है।
