BWF विश्व चैंपियनशिप में त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद का बड़ा उलटफेर, चीनी जोड़ी को हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगह और पदक किया पक्का

Untitled-3

अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन के मंच पर भारत के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण सामने आया है। बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के महिला डबल्स मुकाबले में भारतीय जोड़ी त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए टूर्नामेंट में बड़ा उलटफेर कर दिया है। भारतीय स्टार जोड़ी ने क्वार्टरफाइनल मुकाबले में विश्व की चौथे नंबर की चीनी जोड़ी जी यिफान और झांग शुशियान को पराजित कर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस शानदार जीत के साथ ही प्रतियोगिता में भारत का कम से कम एक पदक पूरी तरह से पक्का हो गया है। यह जीत भारतीय महिला डबल्स बैडमिंटन के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है क्योंकि लंबे समय बाद देश को इस वर्ग में कोई पदक हासिल होने जा रहा है।

मैच के विवरण की बात करें तो भारतीय जोड़ी की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और उन्हें शुरुआती पलों में दबाव का सामना करना पड़ा। चीनी प्रतिद्वंदियों ने शुरुआत में ही छह और दो की मजबूत बढ़त बना ली और पहले गेम में अपना दबदबा कायम रखा। हालांकि त्रिसा और गायत्री ने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे अपने आक्रामक स्मैश और नेट प्ले के जरिए वापसी की कोशिश की। इसके बावजूद चीनी खिलाड़ियों ने अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए पहला गेम इक्कीस और सोला के अंतर से अपने नाम कर लिया। एक गेम से पिछड़ने के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और दूसरे गेम में बेहद आक्रामक और जुझारू खेल का परिचय दिया।

दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी ने लंबी रैलियों में मजबूती से मुकाबला किया और चीनी जोड़ी के लगातार हमलों का शानदार बचाव किया। मध्यांतर के समय भारतीय जोड़ी के पास ग्यारह और दस की मामूली बढ़त थी, लेकिन इसके बाद त्रिसा और गायत्री ने क्रॉस-कोर्ट अटैक के जरिए विरोधी खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ा दिया। भारतीय खिलाड़ियों ने यह गेम इक्कीस और पंद्रह से जीतकर मुकाबला एक-एक की बराबरी पर ला खड़ा किया। निर्णायक और तीसरे गेम में दोनों जोड़ियों के बीच शुरुआती कड़ा मुकाबला देखने को मिला जब स्कोर चार और चार से बराबर था। इसके बाद त्रिसा के एक शक्तिशाली स्मैश ने मैच का पासा पलट दिया और भारतीय जोड़ी ने लगातार सात अंक हासिल कर नौ और चार की मजबूत बढ़त बना ली। ब्रेक तक भारत ग्यारह और पांच से आगे चल रहा था।

मैच के अंतिम पलों में चीनी जोड़ी ने वापसी की पूरी कोशिश की लेकिन दबाव के चलते उनसे लगातार गलतियां होती रहीं। भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी और निर्णायक गेम को इक्कीस और तेरह से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ त्रिसा और गायत्री विश्व चैंपियनशिप के इतिहास में महिला डबल्स का पदक जीतने वाली भारत की महज दूसरी जोड़ी बन गई हैं। इससे पहले वर्ष 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने महिला डबल्स में देश के लिए पहला कांस्य पदक जीता था। भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें अब पुरुष डबल्स में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के मुकाबले पर भी टिकी हैं, जहां जीत मिलने पर भारत का एक और पदक पक्का हो जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed