सीमा सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा कदम, एसएसबी को सौंपी 1129 एकड़ जमीन

पश्चिम बंगाल में भारत और बांग्लादेश की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने की दिशा में एक अहम सफलता हासिल हुई है। केंद्र सरकार की वर्षों पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल को 1129 एकड़ जमीन सौंप दी है। इस भूमि का उपयोग सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। सिलीगुड़ी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इस भूमि हस्तांतरण की जानकारी दी गई और राज्य प्रशासन के इस फैसले की सराहना की गई।
वर्ष 2014 से ही सीमा पर बाड़ लगाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित पड़ी हुई थी, जिसे नई सरकार के गठन के महज 45 दिनों के भीतर पूरा कर लिया गया। सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ को पूरी तरह रोकने और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सीमा पर बाड़ लगाना एक बेहद अनिवार्य कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की पहचान करने, उन्हें चिन्हित करने और नियमानुसार वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया को लगातार जारी रखने पर विशेष बल दिया गया है।
भौगोलिक और सामरिक दृष्टिकोण से सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर ‘चिकन नेक’ के नाम से जाना जाता है, पूरे पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस क्षेत्र की सुरक्षा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए करीब 189 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास और सुरक्षा परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। इसके अतिरिक्त, बिधाननगर में नए पुलिस आयुक्तालय भवन की शुरुआत की गई है और उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में रोगियों की सहायता के लिए 20 बिस्तरों वाले एक आधुनिक नशामुक्ति केंद्र का भी शुभारंभ किया गया है।
कानून और व्यवस्था के क्षेत्र में सुधार लाते हुए देश में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों पर छह दिवसीय जागरूकता प्रदर्शनी की भी शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता संभालने के तीन दिनों के भीतर ही इन नए आपराधिक कानूनों को लागू कर अपनी प्रतिबद्धता दर्ज कराई थी। इन नए कानूनों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों में डर का माहौल समाप्त कर न्याय प्रणाली के प्रति गहरा विश्वास पैदा करना है।
आधुनिक न्याय प्रक्रिया में फोरेंसिक विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग को प्राथमिकता दी गई है, ताकि मामलों का निपटारा तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सके। नए प्रावधानों के माध्यम से आम जनता को समयबद्ध तरीके से न्याय मिलना सुनिश्चित होगा। तकनीक के समावेश से पुलिस जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और आम नागरिकों को अदालती प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी।
