देश में चीनी की कीमतों में उछाल, सरकार ने जमाखोरी पर लगाई रोक और दिए राहत के संकेत

देश भर के आम नागरिकों की जेब पर चीनी की बढ़ती कीमतों का असर देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान बाजार में चीनी के दामों में अचानक तेजी दर्ज की गई है। पिछले महीने जहां चीनी की कीमत 48 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 55 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। इस अचानक आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ बाजार के जानकारों को भी चिंता में डाल दिया है। हालांकि, स्थिति को नियंत्रण में लाने और आम जनता को राहत देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीनी के दामों में हुई इस हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन से जोड़कर देखना पूरी तरह से गलत है। अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि इथेनॉल बनाने के लिए चीनी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने के कारण बाजार में इसकी कमी हो जाती है। लेकिन आंकड़ों के अनुसार, इथेनॉल बनाने में चीनी का उपयोग वर्ष 2022-23 में जहां लगभग 12 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह घटकर महज 9 प्रतिशत के आसपास रह गया है। वर्तमान समय में देश के भीतर इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अनाज, विशेषकर मक्के की फसल से तैयार किया जा रहा है।
मूल्य वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से कई अन्य व्यावहारिक कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। इस साल चीनी का घरेलू उत्पादन शुरुआती अनुमानों की तुलना में कम रहने की संभावना है। गन्ना उत्पादक प्रमुख राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण गन्ने की फसल को पहुंचे नुकसान से अब उत्पादन घटकर लगभग 306 लाख टन रहने का ही अनुमान है। इसके अलावा, आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए बाजार में अचानक मांग बढ़ गई है और वैश्विक स्तर पर भी चीनी की उपलब्धता में कमी दर्ज की गई है।
स्थिति को और अधिक जटिल बनाने में कुछ चीनी मिलों और व्यापारियों द्वारा की जा रही सट्टेबाजी और अवैध जमाखोरी की भूमिका भी सामने आई है। इस कृत्रिम किल्लत को समाप्त करने के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू किए गए हैं। देश भर में चीनी डीलरों के लिए एक तय सीमा लागू की गई है, जिसके तहत वे अगस्त से नवंबर तक अधिकतम 400 टन का ही स्टॉक रख सकेंगे। इसके साथ ही सितंबर से थोक उपभोक्ताओं पर भी शिकंजा कसा जा रहा है, ताकि वे 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का भंडारण न कर सकें। इन उपायों से बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतें स्थिर होने की उम्मीद है।
