देश में सोलर पैनल बनाना होगा आसान, पॉलीसिलिकॉन पर सब्सिडी देने की तैयारी में सरकार

भारत में सौर ऊर्जा के क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े नीतिगत बदलाव की तैयारी की जा रही है। सरकार सोलर पैनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल यानी पॉलीसिलिकॉन पर सीधी सब्सिडी देने की योजना पर काम कर रही है। देश के भीतर सोलर मॉड्यूल और सेल निर्माण की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रस्तावित सब्सिडी योजना का सटीक ढांचा और वित्तीय आवंटन कैसा होगा, इसे लेकर अभी आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया गया है क्योंकि पूरी रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
इससे पहले सरकार सौर ऊर्जा क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना लेकर आई थी। हालांकि, इस प्रोत्साहन योजना के बावजूद देश में पॉलीसिलिकॉन के बड़े पैमाने पर उत्पादन की वैसी क्षमता विकसित नहीं हो सकी, जैसी उम्मीद की जा रही थी। इसी अंतर को पाटने और घरेलू उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अब सीधे सब्सिडी देने का विकल्प तलाशा जा रहा है। इससे भारतीय निर्माताओं को विदेशी घटकों पर अपनी निर्भरता कम करने में बड़ी मदद मिलने की संभावना है।
सोलर विनिर्माण के साथ-साथ देश में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स यानी जल निकायों पर तैरने वाले सौर ऊर्जा संयंत्रों को लेकर भी कड़े और जिम्मेदार दिशानिर्देश तय किए गए हैं। ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने से पहले एक व्यापक प्रबंधन योजना बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रोजेक्ट स्थल के आसपास के पर्यावरण, जल की गुणवत्ता, स्थानीय पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, उन स्थानीय समुदायों और मछुआरों की आजीविका के हितों का विशेष ध्यान रखा जाएगा जो उन जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
झारखंड के रांची स्थित गेटलसुद बांध में हाल ही में सौ मेगावाट क्षमता की एक बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना की शुरुआत की गई है। इस परियोजना के दौरान स्थानीय मछुआरों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित प्रबंधन मॉडल अपनाया गया, जिसके तहत पिंजरे में मछली पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया ताकि उनकी आय पर कोई विपरीत असर न पड़े। इसके अलावा, देश में हरित ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए बैटरी स्टोरेज क्षमता को मजबूत करने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि सौर ऊर्जा का अधिकतम और कुशल उपयोग संभव हो सके।
