जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की उठी मांग

राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर जाति-आधारित आरक्षण व्यवस्था के विरोध में देश के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान में लागू जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाज में असमानता और भेदभाव को बढ़ावा दे रही है। इसलिए सरकार को इसमें तत्काल बदलाव करते हुए आरक्षण का मुख्य आधार जाति के बजाय व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को बनाना चाहिए। इस प्रदर्शन का आयोजन सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से किया गया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली पहुंचे।
दिल्ली पुलिस द्वारा आधिकारिक अनुमति न दिए जाने के बावजूद जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जमा हो गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों ने मौके पर दो स्तरीय बैरिकेडिंग की व्यवस्था की थी। प्रदर्शन स्थल पर एक अस्थायी मंच तैयार किया गया था, जहां पहुंचे युवा हाथों में बैनर, पोस्टर, केसरिया ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर अपनी मांगें बुलंद कर रहे थे। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और करणी सभा जैसे प्रमुख सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चों को उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए हर दस साल में इसकी व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। साथ ही, आरक्षण नीति में क्रीमी लेयर के नियमों को सख्ती से लागू करने और अनुसूचित जाति, जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ी नीतियों को प्रासंगिक बनाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
देर शाम पुलिस और सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ को हटाकर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और वे आर्थिक रूप से पिछड़े हर वर्ग के न्याय के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। युवाओं ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कुछ नियमों पर भी सवाल उठाए। आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों से भी युवाओं के इस आंदोलन में जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।
