टीवी पर विज्ञापनों की 12 मिनट की सीमा खत्म, सरकार ने नियमों में किया बड़ा बदलाव

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देश में टेलीविजन प्रसारण उद्योग और दर्शकों के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव सामने आया है। सरकार ने टीवी चैनलों के लिए प्रति घंटे 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की तय सीमा को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम में संशोधन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह नया नियम प्रभावी हो गया है। इस फैसले के बाद अब टीवी चैनलों पर विज्ञापनों के समय को लेकर पहले से चली आ रही कानूनी पाबंदी खत्म हो गई है, जिससे प्रसारण क्षेत्र को अपनी व्यावसायिक नीतियों को नए सिरे से तय करने की स्वतंत्रता मिल गई है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दशकों में टीवी प्रसारण और मीडिया परिदृश्य में आए व्यापक बदलावों को देखते हुए इस पुराने नियम पर पुनर्विचार करना आवश्यक हो गया था। देश में टीवी उद्योग का पूरा व्यावसायिक ढांचा मुख्य रूप से विज्ञापनों से मिलने वाले राजस्व पर टिका हुआ है, चाहे वह चैनल दर्शकों के लिए भुगतान आधारित यानी पेड हो या फिर मुफ़्त यानी फ्री-टू-एयर। डिजिटल मीडिया के तेजी से विस्तार के बाद अब पारंपरिक टेलीविजन उद्योग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बीच सीधी और कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जिसके चलते टीवी चैनलों को भी समान अवसर दिए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

यह सीमा पहली बार वर्ष 2006 में लागू की गई थी, जब देश में टीवी चैनलों का दायरा काफी सीमित था और उपभोक्ताओं के पास मनोरंजन के बहुत कम विकल्प उपलब्ध थे। उस समय एनालॉग केबल नेटवर्क की प्रसारण क्षमता कम थी और देश में लगभग 62 टीवी चैनल ही संचालित हो रहे थे। आज के समय में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और भारतीय बाजार में 900 से भी अधिक चैनल सक्रिय हैं। केबल टीवी क्षेत्र के पूर्ण डिजिटलीकरण के बाद डीटीएच, आईपीटीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों के आने से टीवी प्रसारण की क्षमता और तकनीक में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।

नियमों में किए गए इस बदलाव का सीधा असर टीवी चैनलों की कमाई और सामग्री के प्रसारण पर पड़ेगा। जहां एक तरफ चैनल अब अपनी व्यावसायिक रणनीति के अनुसार विज्ञापनों का समय तय कर सकेंगे, वहीं दूसरी तरफ डिजिटल मीडिया से मिल रही कड़ी चुनौती के बीच टीवी उद्योग को वित्तीय रूप से मजबूत होने का अवसर मिलेगा। हालांकि, इसके साथ ही चैनलों के सामने यह चुनौती भी रहेगी कि वे अत्यधिक विज्ञापनों के बीच अपने दर्शकों के देखने के अनुभव और सामग्री की गुणवत्ता को कैसे संतुलित बनाए रखते हैं।

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