‘सुधरने वाला नहीं हूँ’, अपमान सहने पर नेहा राठौर के संग चर्चा में बोले राहुल गांधी

Untitled-5

राजनीतिक चर्चाओं और युवाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जन सरोकार से जुड़े मुद्दों पर बेबाक राय देखने को मिली। इस आयोजन के दौरान प्रमुख राजनीतिक नेता राहुल गांधी और प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक लोक गायिका नेहा राठौर के बीच लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की आजादी और सत्ता से सवाल पूछने की चुनौतियों पर खुलकर बात हुई। इस संवाद में दोनों ही हस्तियों ने अपने-अपने अनुभवों को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि आलोचनाओं और निजी हमलों के बावजूद वे जनता की आवाज उठाने का अपना सिलसिला थमने नहीं देंगे।

कार्यक्रम में बातचीत की शुरुआत करते हुए नेहा राठौर ने समाज और राजनीति में महिलाओं के सम्मान और उनकी स्थिति पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि यदि देश की महिलाएं या आम नागरिक सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों से सवाल नहीं कर सकते, तो फिर लोकतंत्र में वास्तविक सम्मान के क्या मायने रह जाते हैं। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब भी उन्होंने सामाजिक या राजनीतिक स्थितियों पर व्यंग्यात्मक गीतों के माध्यम से सवाल उठाए हैं, तो उन्हें सराहना के बदले अक्सर आलोचनाओं, ट्रोलिंग और कानूनी कार्यवाहियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आलोचना और दबाव के बावजूद वे अपने रुख पर अडिग रहेंगी।

नेहा राठौर की बातों पर सहमति जताते हुए राहुल गांधी ने भी अपने वर्षों के राजनीतिक सफर के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें भी लंबे समय से व्यक्तिगत हमलों और आलोचनाओं को सहना पड़ा है। हालांकि, उन्होंने मुस्कुराते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के दबावों से उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आने वाला है और वे आगे भी जनता से जुड़े विषयों पर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

संवाद के दौरान समाज में महिलाओं की स्थिति और डिजिटल स्पेस में उनकी ट्रोलिंग के अंतर पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। यह रेखांकित किया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को जब निशाना बनाया जाता है, तो अक्सर उनके चरित्र और व्यक्तिगत जीवन को लेकर अनुचित टिप्पणियां की जाती हैं, जो कि एक गंभीर सामाजिक समस्या है। बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं और महिलाओं ने इस संवाद को बेहद ध्यान से सुना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निर्भीक होकर सवाल पूछने की आवश्यकता पर बल दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed