बिहार में गंगा उफान पर, 11 जिलों में बाढ़ का कहर, 16.85 लाख लोग प्रभावित, राहत-बचाव अभियान तेज

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बिहार में लगातार बारिश और विभिन्न नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राज्य के कई हिस्सों में गंगा सहित अन्य नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच चुका है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई हैं।

11 जिलों के लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित

राज्य के 11 जिलों के 61 प्रखंडों और करीब 300 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में लगभग 16.85 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। कई जगह खेत, सड़कें और निचले इलाके पानी में डूब गए हैं, जिससे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

राहत और बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी

बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। प्रभावित जिलों में कुल 80 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 1.21 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों तक लगातार खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

एक राहत शिविर भी संचालित किया जा रहा है, जहां 326 लोगों के लिए रहने, भोजन, पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राहत शिविर भी शुरू किए जाएंगे।

हजारों परिवारों तक पहुंचाई गई राहत सामग्री

बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री का वितरण लगातार जारी है। अब तक करीब 45,900 पॉलीथिन शीट वितरित की जा चुकी हैं ताकि लोग अस्थायी आश्रय तैयार कर सकें। वहीं लगभग 11,700 ड्राई राशन पैकेट भी प्रभावित परिवारों को दिए गए हैं। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी प्रभावित गांव में राहत सामग्री की कमी न रहे।

लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 1,158 नावों का संचालन

बाढ़ वाले इलाकों में लोगों की आवाजाही और सुरक्षित निष्क्रमण के लिए पूरे राज्य में 1,158 नावों का संचालन किया जा रहा है। जिन गांवों में सड़क संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया है, वहां नावें ही लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक लाने का मुख्य साधन बनी हुई हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित निकाला जा रहा है।

एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें अलर्ट पर

बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 7 टीमों को अलग-अलग जिलों में तैनात किया गया है। ये टीमें लगातार राहत कार्यों में लगी हुई हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधनों के साथ तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

गंगा नदी कई घाटों पर खतरे के निशान से ऊपर

गंगा नदी का जलस्तर बिहार के कई प्रमुख घाटों पर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है।

  • बक्सर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 0.08 मीटर ऊपर है, हालांकि यहां पानी घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।
  • पटना के दीघा घाट पर जलस्तर 1.54 मीटर और गांधी घाट पर 1.96 मीटर खतरे के स्तर से ऊपर बना हुआ है।
  • हाथीदह में जलस्तर 1.74 मीटर ऊपर दर्ज किया गया है और यहां पानी लगातार बढ़ रहा है।
  • मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 0.51 मीटर ऊपर बह रही है।
  • सुल्तानगंज में जलस्तर 2.01 मीटर और भागलपुर में 0.65 मीटर खतरे के स्तर से ऊपर पहुंच गया है।
  • कहलगांव में भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है, जिससे आसपास के इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

बैराजों से छोड़ा जा रहा भारी मात्रा में पानी

राज्य की प्रमुख नदियों में जलप्रवाह बढ़ने के कारण बैराजों से भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।

  • सोन बराज, इंद्रपुरी से 2,27,739 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और यहां जलप्रवाह घटने की ओर है।
  • कोसी बराज, वीरपुर से 1,68,400 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज स्थिर बना हुआ है।
  • गंडक बराज, वाल्मीकिनगर से 1,29,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और यहां भी जलप्रवाह स्थिर बना हुआ है।

इन बैराजों से छोड़े जा रहे पानी की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि निचले इलाकों में समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके।

अगले दो दिनों तक बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान बिहार के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, नावों और बचाव दलों की संख्या आवश्यकता के अनुसार बढ़ाई जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तुरंत सहायता मिल सके।

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