महिला घरेलू क्रिकेटरों की मैच फीस में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, बीसीसीआई ने 150 फीसदी इजाफा किया

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भारतीय घरेलू क्रिकेट में महिला खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने महिला क्रिकेटरों के वेतन ढांचे में व्यापक बदलाव करते हुए उनकी मैच फीस में 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले को घरेलू स्तर पर खेल रही महिला खिलाड़ियों को आर्थिक मजबूती देने और उन्हें क्रिकेट को एक स्थायी करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला कदम माना जा रहा है।

नए फैसले के बाद अब घरेलू टूर्नामेंटों में खेलने वाली महिला क्रिकेटरों को पहले के मुकाबले करीब ढाई गुना ज्यादा मानदेय मिलेगा। यह अब तक भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी वेतन वृद्धि मानी जा रही है। लंबे समय से यह मांग उठती रही थी कि घरेलू महिला खिलाड़ियों की कमाई इतनी हो कि वे बिना आर्थिक दबाव के खेल पर पूरा ध्यान दे सकें।

संशोधित वेतन ढांचे के तहत सीनियर महिला टूर्नामेंटों में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनने वाली खिलाड़ियों को अब प्रति दिन 50 हजार रुपये दिए जाएंगे, जो पहले सिर्फ 20 हजार रुपये थे। इसी तरह रिजर्व खिलाड़ियों की फीस भी बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति दिन कर दी गई है, जो पहले 10 हजार रुपये थी। टी20 मुकाबलों के लिए भी दरों में बदलाव किया गया है, जहां प्लेइंग इलेवन को 25 हजार रुपये और रिजर्व खिलाड़ियों को 12,500 रुपये प्रति मैच मिलेंगे।

बीसीसीआई ने सिर्फ सीनियर ही नहीं बल्कि जूनियर महिला क्रिकेटरों के हितों का भी ध्यान रखा है। जूनियर टूर्नामेंटों में खेलने वाली प्लेइंग इलेवन की खिलाड़ियों को अब 25 हजार रुपये प्रति दिन मिलेंगे, जबकि पहले उन्हें 10 हजार रुपये मिलते थे। वहीं जूनियर स्तर की रिजर्व खिलाड़ियों की फीस 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 12,500 रुपये प्रति दिन कर दी गई है। जूनियर टी20 मैचों में प्लेइंग इलेवन को 12,500 रुपये और रिजर्व खिलाड़ियों को 6,250 रुपये दिए जाएंगे।

इस बदलाव का सीधा असर महिला खिलाड़ियों की सालाना कमाई पर भी पड़ेगा। पहले एक औसत सीनियर महिला क्रिकेटर, जिसकी टीम लीग स्टेज तक ही सीमित रहती थी, पूरे सीजन में लगभग दो लाख रुपये ही कमा पाती थी। नई फीस संरचना के बाद उनकी सालाना आय में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होगी। इससे न सिर्फ खिलाड़ियों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि उन युवा लड़कियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा जो आर्थिक कारणों से क्रिकेट छोड़ने पर मजबूर हो जाती थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला घरेलू महिला क्रिकेट के प्रतिस्पर्धात्मक स्तर को भी ऊपर उठाएगा। जब खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, तो वे पूरी तरह अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे पाएंगी। महिला प्रीमियर लीग की सफलता के बाद घरेलू स्तर पर यह सुधार भारतीय महिला क्रिकेट के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर बीसीसीआई का यह फैसला साफ संकेत देता है कि बोर्ड अब पुरुष और महिला क्रिकेट के बीच की खाई को कम करने को लेकर गंभीर है और घरेलू ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

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