एनसीआर में प्रदूषण पर सख्ती, भूपेंद्र यादव ने रोहतक, मानेसर, पानीपत और करनाल के एक्शन प्लान की समीक्षा की

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरों रोहतक, मानेसर, पानीपत और करनाल में वायु प्रदूषण को लेकर तैयार किए गए एक्शन प्लान की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए इन शहरों में लगातार खराब हो रही वायु गुणवत्ता पर गहरी चिंता जताई और ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। बैठक में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों, नियंत्रण उपायों और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री ने पीएम10 कणों के लगातार ऊंचे स्तर को गंभीर बताते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। उन्होंने ठोस कचरा प्रबंधन, विशेष रूप से निर्माण और विध्वंस कचरे की समस्या पर भी ध्यान केंद्रित किया, जो औद्योगिक क्षेत्रों में सबसे अधिक देखी जा रही है। भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि इन मुद्दों के समाधान से जुड़े फंडिंग और मंजूरी के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा और इसके लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ जल्द ही एक अहम बैठक की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनसीआर के सभी शहरों को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत लाया जाना जरूरी है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास एक समान और प्रभावी तरीके से लागू हो सकें।
बैठक में अधिकारियों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों की समीक्षा के बाद मंत्री ने कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि स्थापना की सहमति और संचालन की सहमति प्राप्त औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ बिना अनुमति चल रही इकाइयों का भी पूरा डेटा तैयार किया जाए। एनसीआर के सभी जिला मजिस्ट्रेटों और कलेक्टरों को निर्देश दिए गए कि वे सीटीओ और सीटीई अनुमतियों, बिजली कनेक्शन और जीएसटी पंजीकरण से जुड़े आंकड़ों को एकत्र कर आपस में मिलान करें, ताकि अवैध और नियमों का पालन न करने वाली फैक्ट्रियों की पहचान की जा सके, खासकर ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना के मामलों में।
वायु गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी को मजबूत करने के लिए समीर ऐप से जुड़े स्वचालित निरंतर वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए। भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से जुड़े लोगों और संगठनों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने छोटे शहरों में सड़कों की चौड़ाई और यात्रियों की संख्या के अनुसार उपयुक्त आकार के इलेक्ट्रिक सार्वजनिक वाहनों की व्यवस्था करने और सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने की आवश्यकता बताई।
सड़कों पर जमी धूल को नियंत्रित करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों और संकरी सड़कों के लिए हैंडहेल्ड वैक्यूम क्लीनर के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि ऑपरेशनल खर्च मॉडल के तहत केवल इलेक्ट्रिक या सीएनजी आधारित मशीनें ही खरीदी जाएं। खुले स्थानों और फुटपाथों पर धूल नियंत्रण के लिए स्थानीय प्रजाति की झाड़ियां लगाने और सड़कों पर बने गड्ढों की तुरंत मरम्मत के आदेश भी दिए गए।
ट्रैफिक से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सभी शहरों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया गया। निर्माण और विध्वंस कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए हर 5 किलोमीटर के ग्रिड में संग्रह केंद्र स्थापित करने और उन्हें नजदीकी प्रोसेसिंग यूनिट से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे जिम्मेदारी के साथ काम करें, स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करें और नवाचारी लेकिन व्यावहारिक समाधानों के जरिए मजबूत नेतृत्व दिखाएं। बैठक में तय किए गए सभी एक्शन पॉइंट्स को संकलित किया जाएगा और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट द्वारा इनकी रीयल-टाइम निगरानी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक एनसीआर में एयर क्वालिटी इंडेक्स में कम से कम 15 से 20 प्रतिशत तक सुधार किया जाए, जिसके लिए लक्ष्य आधारित कार्रवाई और जवाबदेही तय की जाएगी।
इस उच्चस्तरीय बैठक में सीएक्यूएम के चेयरमैन, पर्यावरण मंत्रालय, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, एनएचएआई, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित शहरों के आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट मौजूद रहे।
