नीतीश कुमार के नेतृत्व में मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना से युवाओं को मिल रहा नीति निर्माण में भागीदारी का अवसर

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माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार राज्य में सुशासन और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार नई पहल कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना यानी सीएमएफएस एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में उभरकर सामने आई है। यह योजना बिहार सरकार और आईआईएम बोधगया की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य प्रतिभाशाली और योग्य युवाओं को नीति निर्माण, प्रशासनिक सुधार और विकास की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल करना है।

मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत चयनित युवाओं को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में काम करने का अवसर मिलता है, जहां वे नीतियों के क्रियान्वयन, योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक नवाचार में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यह योजना युवाओं को न केवल शासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका देती है, बल्कि उन्हें वास्तविक समस्याओं के समाधान में योगदान देने के लिए भी प्रेरित करती है।

सीएमएफएस की खास बात यह है कि इसके अंतर्गत फेलोशिप करने वाले युवाओं को ₹80,000 से लेकर ₹1,50,000 प्रतिमाह तक का मानदेय दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें व्यावहारिक अनुभव, विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर और नेतृत्व कौशल विकसित करने का मंच भी मिलता है। इससे युवाओं के करियर को नई दिशा मिलती है और वे भविष्य में नीति, प्रशासन और विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार होते हैं।

यह योजना राज्य के लिए भी बेहद लाभकारी साबित हो रही है। योग्य और ऊर्जावान युवाओं के जुड़ने से शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और भविष्य उन्मुख बन रही है। मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के माध्यम से बिहार सरकार सुशासन, नीति की प्रभावशीलता और सतत विकास के अपने लक्ष्य को और मजबूत कर रही है। यह पहल न सिर्फ युवाओं को सशक्त बना रही है, बल्कि बिहार को एक नवोन्मेषी और प्रगतिशील प्रशासनिक मॉडल की ओर भी अग्रसर कर रही है।

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