बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए का क्लीन स्वीप, तेजस्वी यादव ने लगाया विधायकों के ‘भितरघात’ और धनबल का आरोप
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए हाई-प्रोफाइल चुनाव का परिणाम सोमवार को सामने आया, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने सभी सीटों पर जीत दर्ज करते हुए क्लीन स्वीप कर लिया। इस जीत के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और भाजपा के शिवेश राम राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। हालांकि परिणाम सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के तीखे आरोपों को लेकर हो रही है। उन्होंने चुनावी हार के पीछे संख्या बल की कमी नहीं बल्कि अपने ही विधायकों के भितरघात और सत्ता पक्ष द्वारा धनबल के इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है।
चुनाव परिणाम के बाद प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन के पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद थी। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन के पास अपने 35 विधायक थे और इसके अलावा एआईएमआईएम के पांच तथा बीएसपी के एक विधायक का समर्थन भी मिल गया था। इस तरह कुल संख्या 41 तक पहुंच गई थी, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़ा था। तेजस्वी के अनुसार यदि सभी विधायक मतदान में शामिल होते तो परिणाम अलग हो सकता था, लेकिन अंतिम समय में चार विधायक गायब हो गए और इसी वजह से पूरा गणित बिगड़ गया।
तेजस्वी यादव ने कहा कि इन चार विधायकों में तीन कांग्रेस के और एक राष्ट्रीय जनता दल का विधायक शामिल था। उनके अनुसार अगर ये चारों विधायक मतदान के समय मौजूद रहते तो महागठबंधन की जीत लगभग तय थी। उन्होंने इसे सीधे तौर पर भितरघात करार देते हुए कहा कि यह पार्टी और गठबंधन के साथ विश्वासघात है। तेजस्वी ने कड़े शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने इस तरह का कदम उठाया है, उन्हें पार्टी भविष्य में जरूर जवाब देगी और समय आने पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
विपक्ष के नेता ने इस पूरे मामले में भाजपा पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग चुनाव को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक तंत्र और धनबल का इस्तेमाल करते हैं। तेजस्वी ने कहा कि यह भाजपा की पुरानी रणनीति रही है कि किसी भी कीमत पर चुनाव जीतने की कोशिश की जाए। उनके मुताबिक सत्ता पक्ष मशीनरी, पैसे और प्रभाव का इस्तेमाल कर विपक्ष को कमजोर करने का प्रयास करता है।
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि महागठबंधन ने इस चुनाव में पूरी मजबूती के साथ मुकाबला किया और आखिरी समय तक संघर्ष किया। हालांकि परिणाम उनके पक्ष में नहीं गया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक चुनावी हार है और विचारधारा की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने अपने समर्थकों से निराश न होने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संघर्ष जारी रखना ही असली राजनीति है।
बिहार की राजनीति में इस परिणाम के बाद नई बहस शुरू हो गई है। जहां एक ओर एनडीए इस जीत को अपनी रणनीतिक सफलता बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सियासी दबाव और अंदरूनी टूट का परिणाम मान रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि महागठबंधन अपने अंदरूनी मतभेदों को किस तरह संभालता है और क्या वास्तव में गायब हुए विधायकों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाता है।
