मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित दंपत्ति की किराना दुकान पर रोका काफिला, नक्सलवाद से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरणादायक कहानी

छत्तीसगढ़ में सुशासन और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे सुशासन तिहार अभियान के दौरान एक ऐसा भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। बीजापुर जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के लिए जाते समय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का काफिला अचानक एक छोटी सी किराना दुकान के सामने रुक गया। सामान्य दिखने वाली इस दुकान के पीछे संघर्ष, बदलाव और आत्मनिर्भरता की ऐसी कहानी थी, जो आज नए बस्तर की पहचान बनती जा रही है।
दुकान चलाने वाले दंपत्ति मासा तामो और जयमोती कभी नक्सली संगठन का हिस्सा थे। दोनों ने जीवन के शुरुआती दौर में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। गरीबी, पारिवारिक समस्याएं और संसाधनों की कमी ने उन्हें ऐसे रास्ते पर पहुंचा दिया, जहां से सामान्य जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल था। समय के साथ दोनों की मुलाकात हुई और उन्होंने विवाह कर लिया, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि हिंसा और संघर्ष का रास्ता उनके भविष्य के लिए सही नहीं है। उन्होंने यह भी समझा कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर जीवन देने के लिए मुख्यधारा में लौटना ही सबसे अच्छा विकल्प है।
आखिरकार दोनों ने साहसिक निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। पुनर्वास केंद्र पहुंचने के बाद उन्हें न केवल सुरक्षा और सहयोग मिला, बल्कि जीवन को नए सिरे से शुरू करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। यहां उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। पहली बार उन्होंने पढ़ना-लिखना सीखा और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।
सरकारी सहायता के माध्यम से उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जिससे वे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में सक्षम हुए। बैंकिंग सेवाओं से जुड़ने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इसी सहयोग के बल पर उन्होंने अपने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की, जो आज उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत बन चुकी है।
मुख्यमंत्री जब उनकी दुकान पर पहुंचे तो उन्होंने दोनों से आत्मीय बातचीत की और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के बारे में जानकारी ली। उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदकर दंपत्ति का उत्साहवर्धन किया और आत्मनिर्भरता की इस पहल की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब लोगों को अवसर, विश्वास और सहयोग मिले। उन्होंने इस कहानी को बदलते बस्तर का प्रतीक बताया।
मासा और जयमोती ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आज वे सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। दुकान से होने वाली आय के माध्यम से वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं और भविष्य को लेकर आशावान हैं। उनका कहना है कि कुछ वर्ष पहले तक उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका जीवन इतनी तेजी से बदल सकता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग ने उन्हें नई पहचान और नया आत्मविश्वास दिया।
यह कहानी केवल एक दंपत्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों से निकलकर बेहतर जीवन की तलाश में हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि पुनर्वास, शिक्षा और रोजगार के अवसर किसी भी व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह बदल सकते हैं। साथ ही यह भी साबित करता है कि विकास और विश्वास के माध्यम से समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
