विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में टिकट को लेकर असमंजस, भाजपा की रणनीति साफ
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल लगातार पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ने का संदेश दे रहे हैं। विभिन्न बैठकों और कार्यक्रमों में कांग्रेस नेतृत्व यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी पूरी तरह संगठित है और चुनावी मैदान में भाजपा को कड़ी चुनौती देने के लिए तैयार है। हालांकि, जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। कांग्रेस में यह साफ नहीं हो पा रहा है कि कौन नेता किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेगा, जिससे पार्टी के भीतर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।
विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस में असमंजस और बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई दावेदार अपनी-अपनी सीटों पर दावेदारी जता रहे हैं, जबकि कुछ नेता सीट बदलने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इस अनिश्चितता के चलते कार्यकर्ताओं में भी भ्रम की स्थिति है, क्योंकि अभी तक यह स्पष्ट संकेत नहीं मिल पाए हैं कि पार्टी किस चेहरे पर कहां से भरोसा जताने जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही इस असमंजस को दूर नहीं किया गया, तो इसका असर कांग्रेस की चुनावी तैयारी पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर काफी हद तक स्पष्टता दिखा दी है। भाजपा ने संकेत दे दिए हैं कि मौजूदा मंत्री और विधायक अपनी-अपनी वर्तमान विधानसभा सीटों से ही चुनाव लड़ेंगे और उन्हें किसी दूसरी सीट पर टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी ने अपने नेताओं को पहले से तय विधानसभा क्षेत्रों से जोड़कर रखने की रणनीति अपनाई है, ताकि संगठनात्मक मजबूती बनी रहे और चुनाव के दौरान भ्रम की स्थिति न पैदा हो।
भाजपा की यह रणनीति कांग्रेस के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है, क्योंकि जहां एक ओर भाजपा अपने उम्मीदवारों और सीटों को लेकर स्पष्ट दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं कांग्रेस अब भी टिकटों को लेकर उलझी हुई दिख रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस नेतृत्व किस तरह इस असमंजस को दूर करता है और क्या वह समय रहते अपने उम्मीदवारों की तस्वीर साफ कर पाता है या नहीं। चुनावी माहौल में दोनों दलों की रणनीतियां ही यह तय करेंगी कि जनता का भरोसा किस ओर झुकता है।
