सोने-चांदी में साप्ताहिक गिरावट, आखिरी कारोबारी दिन लौटी चमक

बुलियन बाजार में बीते सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रहा। अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े आने और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने से निवेशकों के बीच लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने की आशंकाएं बढ़ गईं। इसका असर कीमती धातुओं की कीमतों पर भी देखने को मिला।
हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोने और चांदी में जोरदार रिकवरी देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर प्रस्तावित हवाई हमलों को रद्द किए जाने के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना। वाशिंगटन और तेहरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे कीमती धातुओं में राहत भरी तेजी दर्ज की गई।
इसके बावजूद सप्ताह के दौरान पहले हुई गिरावट की भरपाई नहीं हो सकी और सोना-चांदी दोनों ही नकारात्मक रुख के साथ सप्ताह का समापन करने में मजबूर रहे।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा अनुबंध में सप्ताहभर के दौरान 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के अंत में यह 1 लाख 50 हजार 528 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
वहीं जुलाई डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध में लगभग 1 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट रही और यह 2 लाख 46 हजार 186 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स (COMEX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव सप्ताहभर में 2.9 प्रतिशत गिरकर 4,239 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुए।
इसी तरह जुलाई डिलीवरी वाली चांदी के वायदा अनुबंध में 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह सप्ताह के अंत में 67.97 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक महंगाई, ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं पर बनी हुई है।
