जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 में भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे अहम भागीदारी

वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन फ्रांस के एवियान शहर में शुरू हो रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक चुनौतियों, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श करेंगी। इस सम्मेलन में फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली और जापान के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही यूरोपीय संघ और यूरोपीय आयोग के प्रमुख भी चर्चा का हिस्सा बनेंगे।
इस बार सम्मेलन की विशेषता यह है कि कई महत्वपूर्ण उभरती अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रीय शक्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। भारत, ब्राजील, मिस्र, केन्या, दक्षिण कोरिया, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, यूक्रेन और संयुक्त अरब अमीरात को साझेदार देशों के रूप में आमंत्रण दिया गया है। यह दर्शाता है कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए अब केवल विकसित देशों की भागीदारी पर्याप्त नहीं मानी जा रही, बल्कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।
भारत इस मंच पर 13वीं बार साझेदार देश के रूप में भाग ले रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन के संपर्क सत्र में शामिल होकर विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेंगे। उनकी भागीदारी केवल भारत के प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्व मंच पर देश की बढ़ती राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का भी प्रतीक है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आज निवेश, व्यापार, डिजिटल नवाचार, हरित ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यही कारण है कि जी-7 जैसे प्रभावशाली समूह के लिए भारत एक महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर उभरा है।
सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु संकट और नई तकनीकों के तेजी से विस्तार ने वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित किया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे विषय भी अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में तेजी से प्रमुख होते जा रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत की भागीदारी वैश्विक चर्चा को संतुलित दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है।
भारत लंबे समय से विकासशील और अल्पविकसित देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाता रहा है। इस सम्मेलन में भी भारत उन देशों के हितों और चिंताओं को सामने रख सकता है, जो वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक निर्णयों से प्रभावित होते हैं। साथ ही, यह मंच भारत को विकसित देशों के साथ तकनीकी सहयोग, निवेश अवसरों और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जी-7 सम्मेलन में भारत की सक्रिय उपस्थिति न केवल उसकी वैश्विक साख को मजबूत करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में उसकी भूमिका को भी और प्रभावशाली बनाएगी। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत एक ऐसे देश के रूप में उभर रहा है जो विकसित और विकासशील दुनिया के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य कर सकता है। यही कारण है कि इस वर्ष का जी-7 शिखर सम्मेलन भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
