भारत के हरित भविष्य में भी अहम रहेगा कोयला, पीएम मोदी ने जी किशन रेड्डी के लेख को बताया ‘मस्ट-रीड’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी के एक लेख को साझा करते हुए कहा कि भारत का कोयला क्षेत्र बीते 11 वर्षों में बड़े बदलाव से गुजरकर अब नेक्स्ट जेनरेशन फ्यूल के रूप में उभर रहा है, जो देश के हरित और विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। एक्स पर जी किशन रेड्डी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने इस लेख को ‘मस्ट-रीड’ बताया और कहा कि इसमें बताया गया है कि कोयला किस तरह ग्रीन टेक्नोलॉजी के साथ जुड़कर विकसित भारत 2047 की यात्रा में अहम भूमिका निभाएगा।
इससे पहले जी किशन रेड्डी ने ‘Coal Powers India’s Reform Express’ शीर्षक से अपना लेख साझा करते हुए कहा था कि भारत का कोयला क्षेत्र सुधार, पारदर्शिता और भविष्य के लिए तैयार व्यवस्था की एक मजबूत कहानी पेश करता है। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह क्षेत्र अपारदर्शिता और अक्षमता से निकलकर टेक्नोलॉजी आधारित और बाजारोन्मुख बन चुका है। लेख में उन्होंने भारत में कोयला खनन के 18वीं सदी से लेकर 1970 के दशक में राष्ट्रीयकरण और उसके बाद आई नीतिगत चुनौतियों तक के सफर का उल्लेख किया है और बताया है कि भरपूर भंडार होने के बावजूद लंबे समय तक उत्पादन वैश्विक स्तर से पीछे रहा, जिससे उद्योग और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हुई।
रेड्डी के अनुसार वर्ष 2014 एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ जब इस क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार लागू किए गए, जिनमें अपारदर्शी आवंटन प्रणाली को खत्म करना, पारदर्शी नीलामी शुरू करना और वाणिज्यिक कोयला खनन को खोलना शामिल था। इन कदमों से निवेशकों का भरोसा लौटा, खदानों की योजना और लॉजिस्टिक्स बेहतर हुए और शासन व्यवस्था मजबूत हुई। लेख में बताया गया है कि भारत ने 2024–25 में एक अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है और 2030 तक इसे 1.5 अरब टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। कोयला आज भी भारत की ऊर्जा प्रणाली की रीढ़ बना हुआ है, जो बिजली उत्पादन और प्राथमिक ऊर्जा खपत में बड़ी हिस्सेदारी निभाते हुए तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को सस्ती और स्थिर बिजली उपलब्ध कराता है।
इसके साथ ही लेख में यह भी कहा गया है कि कोयला अब जलवायु और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप खुद को ढाल रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियां नवीकरणीय ऊर्जा, बायोमास को-फायरिंग, कार्बन कैप्चर, कोल गैसीफिकेशन और डिजिटल माइन मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों में निवेश कर रही हैं। भूमिगत कोयला गैसीफिकेशन और वॉश्ड कोल जैसी पहलें आने वाले दशकों में कोयले के नए स्वरूप की ओर इशारा करती हैं।
जी किशन रेड्डी ने कोयले को औद्योगिक विकास का एक मजबूत आधार बताते हुए कहा कि यह स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम, उर्वरक और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों को मजबूती देता है और खनन, परिवहन व संबद्ध उद्योगों में बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ तकनीकों के साथ कोयले का एकीकरण इसे भविष्य में भी प्रासंगिक और मजबूत बनाए रखेगा।
