इंडिगो संकट गहराया: क्रू की कमी, तकनीकी खामियों और प्रबंधन विफलता ने यात्रियों को किया बेघर-बेबस

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इंडिगो एयरलाइन इन दिनों अपने अब तक के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। पिछले छह दिनों में सात लाख से अधिक यात्री बेघर, परेशान और बेबस नज़र आए हैं। यह अभूतपूर्व अव्यवस्था अचानक नहीं हुई, बल्कि महीनों से पनप रहे उन तनावों, प्रबंधन की खामियों और परिचालन असंतुलनों का नतीजा है जिन्हें न कंपनी ने समय रहते स्वीकार किया और न ही नियामक या सरकार ने गंभीरता से लिया।

 फ्लाइट बढ़ीं, पर क्रू व स्टाफ की कमी ने पैदा किया संकट
इंडिगो ने पिछले दो वर्षों में अपने रूट नेटवर्क और फ्लाइट ऑपरेशंस में तेज़ी से विस्तार किया, लेकिन पायलट, केबिन क्रू और तकनीकी स्टाफ की संख्या उसी रफ्तार से नहीं बढ़ाई गई। कई महीनों से क्रू ड्यूटी शेड्यूल में गड़बड़ियां बढ़ रही थीं। थकान, ओवरवर्क और स्टाफ की कमी की शिकायतें लगातार आती रहीं, पर इसे ऑपरेशनल उतार-चढ़ाव बताकर नज़रअंदाज किया गया।

एशिया पैसिफिक रीजनल एविएशन सेल (ICAO) की समीक्षा में भी खुलासा हुआ है कि सिस्टम क्रू को वह समर्थन नहीं दे पा रहा था जिसकी जरूरत थी। एक आंतरिक रिपोर्ट में दर्ज पंक्ति स्थिति की गंभीरता दिखाती है—
“हम विमान उड़ा रहे हैं, लेकिन सिस्टम हमें चलने की अनुमति नहीं दे रहा।”

इमरजेंसी प्रोटोकॉल भी समय पर सक्रिय नहीं हुआ
जब बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने लगीं, तब एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, CISF, स्थानीय प्रशासन और एयरलाइन के संयुक्त इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को सक्रिय होना चाहिए था। लेकिन इस बार यह भी नहीं हुआ। कई हवाई अड्डों ने बताया कि इंडिगो ने न तो कोऑर्डिनेशन कॉल भेजी और न ही कोई इमरजेंसी अनुरोध।

 स्पेयर प्लेन और स्पेयर क्रू… दोनों की भारी कमी ICAO की रिपोर्ट में एक और गंभीर तथ्य सामने आया — इंडिगो ए320 और ए321 नियो फ्लीट पर भारी निर्भर है, जिनके इंजन (Pratt & Whitney) में दो साल से रखरखाव की चुनौतियाँ बढ़ी हैं। इसके बावजूद कंपनी के पास स्पेयर प्लेन रोटेशन बहुत कम था। यानी एक विमान बंद होने पर पूरी रूट चेन प्रभावित हो रही थी।

10 प्रमुख हवाई अड्डों पर स्टैंडबाय क्रू की संख्या 12–18 तक सिमटी रही, जबकि रोजाना 100 से अधिक विमानों को वैकल्पिक क्रू की जरूरत पड़ती है।

पहले 48 घंटे में भी रही बड़ी चूक यदि DGCA समय पर अनिवार्य रिकवरी प्लान लागू कर देती, तो संकट शुरुआती चरण में ही नियंत्रित हो सकता था। लेकिन 48 घंटे तक इसे इंडिगो का ‘आंतरिक मामला’ बताकर छोड़ दिया गया। जब तक सरकार सक्रिय हुई, स्थिति राष्ट्रीय विमानन संकट में बदल चुकी थी।

 फिर से संकट का खतरा बरकरार अंतरराष्ट्रीय ऑडिट विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इंडिगो ने तत्काल क्रू बफर, तकनीकी स्पेयर, मेंटेनेंस विंडो और रूट कंजेशन जैसे बुनियादी परिचालन क्षेत्रों में सुधार नहीं किया, तो ऐसा संकट दोबारा खड़ा हो सकता है।

यह घटना भारत की विमानन प्रणाली की उन छिपी कमजोरियों का भी पर्दाफाश करती है जिन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जाता रहा है। यही वजह है कि इसे भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए सबसे बड़ा वेक-अप कॉल माना जा रहा है—एक ऐसी चेतावनी जिसे अब किसी भी कीमत पर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

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