INDORE पेयजल कांड: उमा भारती ने कलई खोल दी, मंत्री और महापौर से इस्तीफा मांगा

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भोपाल, 2 जनवरी 2026: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस बीच जब स्थानीय विधायक एवं मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने, पब्लिक की सिंपैथी हासिल करने के लिए कहा कि अधिकारी सुनते नहीं हैं, तो यह बयान उनके लिए ही उल्टा पड़ गया। पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती ने कलई खोल कर रख दी। राजनीति का धर्म याद दिलाते हुए इस्तीफा मांग लिया। सोशल मीडिया पर भी पब्लिक जमकर घंटा बजा रही है।

महापौर ने खुद को मासूम और लाचार बताया
भागीरथपुरा कांड में सभी समस्याओं का तत्काल समाधान करने के लिए एसीएस (अपर मुख्य सचिव) संजय दुबे इंदौर पहुंचे। तो इस मीटिंग में भी पॉलिटिक्स कर दी गई। मीटिंग के बाद श्री भार्गव द्वारा मीडिया को बताया गया कि उन्होंने अपर मुख्य सचिव के सामने अपनी सारी भड़ास निकाल दी है। यहां तक कह दिया है कि आप मुख्यमंत्री जी को बता दो कि मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता। कुल मिलाकर महापौर ने इस प्रकार से स्वयं को मासूम और लाचार बताने की कोशिश की ताकि जनता उनके प्रति सॉफ्ट हो जाए।

कैलाश विजयवर्गीय भी अधिकारियों का रोना रो चुके हैं
इंदौर के सबसे पावरफुल नेता और मध्य प्रदेश सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय भी अपने क्षेत्र के मामले को लेकर अक्सर अधिकारियों का रोना रो चुके हैं। हालांकि यह तो उनका अपना डिपार्टमेंट है। इसके बाद भी उन्होंने कहा कि अधिकारी मेरी नहीं सुनते।

उमा भारती ने कहा: ऐसे पापों का स्पष्टीकरण नहीं होता
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती लंबे समय से मध्य प्रदेश के मामलों को लेकर चुप हैं लेकिन इस मामले में जब अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के स्थान पर महापौर कलेक्टर-कमिश्नर और अन्य अधिकारियों को जिम्मेदार बता रहे हैं तो उमाश्री से भी रहा नहीं गया। उन्होंने X पर बयान जारी करते हुए लिखा है कि:-

  1. इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं।
  2. जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?
  3. ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!

सोशल मीडिया पर जनता घंटा बजा रही है
इस मामले में इंदौर के महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव और स्थानीय विधायक एवं मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय पब्लिक के डायरेक्ट टारगेट पर हैं। श्री विजयवर्गीय ने सवालों को डोमिनेट करने की कोशिश की थी। इसके बाद स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई। कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के दल ज्यादा कुछ नहीं कर पाए लेकिन पब्लिक ने काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह सिलसिला लगातार जारी है। सोशल मीडिया पर जनता लगातार घंटा बजा रही है।

पब्लिक इंदौर के महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव से पूछ रहे हैं कि, अवार्ड लेते समय तो बड़े चौड़े हो जाते हो और आज जब जिम्मेदारी लेने की बात आई तो खुद को स्कूल के बच्चे की तरह मासूम बता रहे हो। यदि कुर्सी संभाल नहीं रही तो इस्तीफा दे दीजिए। मुख्यमंत्री जी को बताने की क्या जरूरत है?

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