जबलपुर में अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्वामी रामभद्राचार्य ने रखे विचार

जबलपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में देश और विदेश से आए विद्वानों, संतों और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के जीवन को देखने से जीवन के सबसे कठिन प्रश्नों के उत्तर सहज ही मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं दो महापुरुषों के माध्यम से दुनिया में भारत की पहचान बनी है और सनातन संस्कृति का मूल भाव अंधकार से प्रकाश की ओर जाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होकर समाज को सही दिशा दिखाई। निषादराज और शबरी माता के प्रसंग प्रेम, करुणा और समानता का संदेश देते हैं, जबकि रामराज्य की कल्पना आज भी मानवता के लिए आदर्श है। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग साढ़े पांच सौ वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ और इसमें स्वामी रामभद्राचार्य की विद्वत्ता और तर्कशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर को ऋषि जाबालि की पावन भूमि बताते हुए कहा कि नर्मदा की गोद में बसे इस नगर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का आयोजन अपने आप में गौरव का विषय है। उन्होंने सम्मेलन में आए देश विदेश के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मध्यप्रदेश सरकार की ओर से शुभकामनाएं दीं।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस सनातन संस्कृति के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में दुनिया भर से आए 120 विद्वान रामायण और श्रीराम के विभिन्न आयामों पर विचार रख रहे हैं और हजारों श्रीराम भक्तों ने सुंदरकांड के पाठ कर वातावरण को भक्ति से सराबोर कर दिया है।
स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि राम का अर्थ ही राष्ट्र का मंगल है। उन्होंने रामायण को राष्ट्र ग्रंथ घोषित करने का सुझाव देते हुए कहा कि श्रीराम के आदर्श आज भी समाज को सही मार्ग दिखा सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सामाजिक सरोकारों की भी सराहना की।
विधायक अजय विश्नोई ने सम्मेलन की जानकारी देते हुए बताया कि यह यात्रा वर्ष 2004 से निरंतर चल रही है और इस बार इसमें 25 सत्रों में देश विदेश के करीब 60 वक्ता भाग ले रहे हैं। जबलपुर में आयोजित यह बहुआयामी रामायण सम्मेलन भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के वैश्विक प्रसार का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
