लोकसभा में चुनाव सुधारों पर आज होगी अहम चर्चा, राज्यसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर जारी बहस

लोकसभा में आज चुनाव सुधारों पर आगे चर्चा जारी रहेगी। कल हुई बहस के दौरान विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में भी कई बार मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया, लेकिन अब विपक्ष इसे मुद्दा बना रहा है। उन्होंने भारत के मतदान तंत्र की सराहना करते हुए कहा कि आजादी के बाद से हर नागरिक को समान मताधिकार प्राप्त है।
न्याय मंत्री ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर महिलाओं को लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि भारत में चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र का उत्सव है, जिसमें करोड़ों लोग शामिल होते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत की चुनाव प्रक्रिया डॉ. भीमराव आंबेडकर के निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार संचालित होती है।
इसी बीच, राज्यसभा में आज राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150वें वर्ष पर चर्चा आगे बढ़ेगी। कल चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम विकसित भारत की यात्रा में सदैव प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने इस विषय को पश्चिम बंगाल चुनावों से जोड़ने पर कांग्रेस की आलोचना की।
अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी अपनी बैठकों की शुरुआत वंदे मातरम के साथ करते थे और आज भी सीमा पर सैनिक वंदे मातरम के उद्घोष के साथ सर्वोच्च बलिदान देते हैं। उन्होंने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि वंदे मातरम ने तमाम प्रतिबंधों के बावजूद जन-जन के हृदय में स्थान बनाया।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा में कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस ने वंदे मातरम को नारा बनाया था। उन्होंने बताया कि असहयोग आंदोलन के दौरान लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता वंदे मातरम गाते हुए जेल गए। श्री खरगे ने यह भी कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कोलकाता में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान पहली बार वंदे मातरम गाया, जिसके बाद यह जनजीवन में गहराई से स्थापित हो गया।
