: MIT के वैज्ञानिकों ने बनाया बिजली स्टोर करने वाला कंक्रीट, इमारतें बनेंगी विशाल बैटरी
अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MIT के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में निर्माण क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। शोधकर्ताओं ने एक खास तरह का कंक्रीट तैयार किया है, जो इमारतों को सिर्फ मजबूती ही नहीं देगा, बल्कि बिजली को स्टोर करने की क्षमता भी रखेगा। इस नवाचार के जरिए घर, सड़कें और पुल केवल संरचनात्मक ढांचे नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा भंडारण के बड़े माध्यम के रूप में भी काम कर सकेंगे।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह कंक्रीट सुपरकैपेसिटर की तरह काम करता है, जो ऊर्जा को तेजी से स्टोर और जरूरत के समय रिलीज कर सकता है। अगर इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, तो भविष्य में इमारतों की दीवारें, नींव और सड़कें खुद ऊर्जा संग्रहण प्रणाली का हिस्सा बन सकती हैं। इससे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे सोलर और विंड एनर्जी को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग में लाने में मदद मिलेगी।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक स्मार्ट सिटी, ग्रीन बिल्डिंग और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। बिजली भंडारण के लिए अलग से बैटरियों पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा की लागत व पर्यावरण पर पड़ने वाला असर भी घटेगा। आने वाले समय में यह कंक्रीट शहरी विकास और ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है।
