मुजफ्फरपुर में गणतंत्र दिवस पर मोहन भागवत ने संविधानिक कर्तव्यों और तिरंगे के महत्व पर जोर दिया

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बिहार के मुजफ्फरपुर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नागरिकों से संविधान में निहित कर्तव्यों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक सशक्त और स्थिर गणतंत्र के निर्माण के लिए केवल अधिकारों की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर नागरिक को अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों को भी समझना होगा। उनके अनुसार भारतीय संविधान हमें केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि धर्म, नैतिकता और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है।

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता असंख्य बलिदानों और लंबे संघर्ष का परिणाम है। ऐसे में हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने आचरण और कार्यों के माध्यम से देश को और अधिक मजबूत बनाए। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि केसरिया रंग त्याग और सक्रियता का प्रतीक है, सफेद रंग शुद्ध विचार और सत्य को दर्शाता है, जबकि हरा रंग प्रगति और समृद्धि का संकेत देता है। बीच में स्थित अशोक चक्र यह संदेश देता है कि विकास और प्रगति सदैव धर्म और नैतिकता के मार्गदर्शन में ही होनी चाहिए।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संविधान समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करता है और समानता, न्याय, स्वतंत्रता और भाईचारे जैसे मूल्यों की रक्षा करता है। उन्होंने नागरिकों से सार्वजनिक जीवन में आदर्श व्यवहार अपनाने, नियमों और कानूनों का सम्मान करने तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी गणतंत्र की मजबूती उसके नागरिकों के चरित्र और आचरण पर निर्भर करती है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आरएसएस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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