मध्यप्रदेश में किसानों की बल्ले-बल्ले: गेहूं खरीदी में बना रिकॉर्ड, 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

मध्यप्रदेश में किसानों के हितों को केंद्र में रखकर किए जा रहे फैसलों का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर कृषि क्षेत्र में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों और व्यवस्थाओं के लिए आभार व्यक्त किया। मुलाकात के दौरान किसानों ने विशेष रूप से गेहूं खरीदी व्यवस्था, समर्थन मूल्य के साथ बोनस भुगतान और ऋण अदायगी संबंधी राहत उपायों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने किसानों से चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है और राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इस वर्ष गेहूं उपार्जन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। राज्य में बड़ी संख्या में किसानों ने समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेची और सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ उठाया। किसानों की भागीदारी के मामले में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। गेहूं खरीद अभियान के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए खरीद केंद्रों पर विशेष व्यवस्थाएं की गईं। समय पर तौल, भुगतान और परिवहन जैसी सुविधाओं ने किसानों का भरोसा और मजबूत किया।
किसानों को गेहूं के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त बोनस का लाभ भी दिया गया। इससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली। सरकार द्वारा हजारों करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई गई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर भुगतान और पारदर्शी खरीद व्यवस्था किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्य सरकार द्वारा ऋण अदायगी की समय-सीमा बढ़ाने का निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है। इससे उन किसानों को अतिरिक्त समय मिला जो प्राकृतिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से समय पर भुगतान नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को चार गुना तक मुआवजा देने की व्यवस्था को भी किसानों ने ऐतिहासिक और हितकारी कदम बताया।
बैठक के दौरान किसानों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे। उन्होंने मूंग और उड़द की खरीद व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने, पंजीयन प्रक्रिया को सरल करने तथा सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। किसानों का सुझाव था कि नहरों को तालाबों से जोड़ा जाए ताकि जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को वर्षभर पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री ने इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक अध्ययन और कार्रवाई के निर्देश देने का आश्वासन दिया।
प्रदेश में कृषि विकास को नई दिशा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को किसानों ने सकारात्मक बताया। उनका मानना है कि यदि इसी प्रकार किसानों की समस्याओं का समाधान और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ता रहा तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में कृषि उत्पादन और किसान समृद्धि के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकता है। यह मुलाकात केवल आभार व्यक्त करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों और सरकार के बीच बेहतर संवाद और सहयोग का भी मजबूत उदाहरण बनी।
