डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में बहुभाषी और वॉयस आधारित एआई की जरूरत, अमिताभ नाग ने बताया जरूरी

भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आम लोगों के जीवन से जोड़ा जाना है, तो उसका बहुभाषी और आवाज के जरिए काम करने वाला होना बेहद जरूरी है। डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने कहा है कि भाषा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधा नहीं बननी चाहिए और एआई को इसी उद्देश्य के साथ विकसित किया जाना चाहिए।
अमिताभ नाग ने कहा कि भाषा आधारित एआई से लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और सरकारी व डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं ज्यादा प्रभावी बन सकेंगी। इससे शिकायतों के निपटारे में तेजी आएगी, डॉक्टरों के लिए रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार करना आसान होगा और डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच पाएंगे।
भुवनेश्वर में डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बातें कहीं। इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि और विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियां शामिल हुईं। बैठक के दौरान देशभर में चल रही डिजिटल स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और उनके तेज क्रियान्वयन पर विचार किया गया।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे डिजिटल स्वास्थ्य सिस्टम का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनमें एआई की भूमिका और भी अहम होती जा रही है। एआई तकनीक के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और नागरिकों के अनुकूल बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम की एक अहम उपलब्धि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के बीच हुए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना रहा। इस समझौते के तहत आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसे एनएचए के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बहुभाषी अनुवाद सेवाएं और एआई आधारित भाषा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के संयुक्त सचिव किरण गोपाल वास्का ने कहा कि भाषा आधारित एआई और आवाज को टेक्स्ट में बदलने वाली तकनीक डॉक्टरों पर काम का दबाव कम कर सकती है। इससे मरीज और डॉक्टर के बीच संवाद बेहतर होगा और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड अपने आप तैयार हो सकेंगे।
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ मिलकर लाभार्थियों और प्रशासनिक प्लेटफॉर्म पर बहुभाषी और वॉयस आधारित समाधान लागू करने में सहयोग करेगा। इसमें डेटा सुरक्षा, सिस्टम का सुरक्षित एकीकरण और वास्तविक उपयोग के अनुभव से भाषा मॉडल को और बेहतर बनाना शामिल होगा।
कार्यक्रम में हुई चर्चाओं का मकसद यही रहा कि एआई आधारित तकनीक के जरिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए और भाषा के कारण कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे। लक्ष्य यह है कि डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म देश की हर भाषा और हर क्षेत्र के लोगों के लिए सरल, उपयोगी और सुलभ बनें।
