ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर जोर, चंडीगढ़ में नाबार्ड की राज्य स्तरीय ऋण संगोष्ठी आयोजित

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नाबार्ड द्वारा चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय ऋण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों, बैंकों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि को लाभकारी बनाए बिना ग्रामीण समृद्धि की कल्पना अधूरी है।

कार्यक्रम में कहा गया कि बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप कृषि क्षेत्र में नवाचार को प्राथमिकता देनी होगी। ‘कम भूमि में अधिक उत्पादन’ और ‘पर ड्रॉप–मोर क्रॉप’ जैसे सिद्धांतों को केवल कागजों और नीतियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जल संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

संगोष्ठी के दौरान नाबार्ड द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए स्टेट फोकस पेपर भी जारी किया गया। इस दस्तावेज में हरियाणा के प्राथमिकता क्षेत्र के लिए ऋण क्षमता 3 लाख 67 हजार करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है, जिसे राज्य की आर्थिक मजबूती और विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

इस अवसर पर सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य संस्थाओं द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की भी सराहना की गई। बेहतर प्रदर्शन करने वाली विभिन्न समितियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया, ताकि वे भविष्य में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें। संगोष्ठी ने ग्रामीण विकास, कृषि ऋण और वित्तीय समावेशन को गति देने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान किया।

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