जब जासूसी बनी मजाक, गोवा में शुरू होता है हैप्‍पी का मिशन

Untitled-7

यह पैरोडी फिल्म दर्शकों को 90 के दशक के गोवा में ले जाती है, जहां कहानी की शुरुआत एक जोरदार मुठभेड़ से होती है। गोवा में कुख्यात गैंगस्टर जिम्मी, जिसका किरदार आमिर खान निभाते नजर आते हैं, दो इंटरनेशनल एजेंट्स के साथ आमने-सामने आता है। इस मुठभेड़ में जिम्मी मारा जाता है, लेकिन इस हिंसक टकराव के बीच एक मासूम बच्चा अनाथ हो जाता है। बच्चे की मां भी इस गोलीबारी में अपनी जान गंवा देती है। हालात ऐसे बनते हैं कि इंटरनेशनल एजेंट्स उस बच्चे की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लेते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं।

कहानी इसके बाद करीब तीस साल आगे बढ़ती है और आज के दौर में पहुंचती है। वही अनाथ बच्चा अब बड़ा होकर हैप्‍पी बन चुका है, जिसका किरदार वीर दास निभा रहे हैं। हैप्‍पी अपने एजेंट पिता की राह पर चलना चाहता है और इंटरनेशनल एजेंसी MI7 का हिस्सा बनने का सपना देखता है। हालांकि उसकी काबिलियत एजेंसी के तय पैमानों पर खरी नहीं उतरती। हैप्‍पी अब तक MI7 की परीक्षा में सात बार फेल हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि वह जासूसी से ज्यादा डांस और कुकिंग में माहिर है, जो इस फिल्म की कॉमेडी का बड़ा आधार बनता है।

इन सबके बावजूद एजेंसी उसे एक अहम मिशन पर भेजने का फैसला करती है। हैप्‍पी को उसकी जन्मभूमि गोवा में एक गोरी साइंटिस्ट को ढूंढने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इस मिशन के लिए उसे भारत और हिंदी की ट्रेनिंग दी जाती है और यह ट्रेनिंग भी बेहद अनोखे तरीके से होती है। एजेंसी उसे हिंदी और भारतीय संस्कृति समझाने के लिए बॉलीवुड की फिल्में दिखाती है, जिससे कई मजेदार हालात पैदा होते हैं।

गोवा पहुंचने के बाद हैप्‍पी की मुलाकात कई दिलचस्प किरदारों से होती है। वह लोकल कोऑर्डिनेटर गीत से मिलता है, जिसका किरदार शारिब हाशमी ने निभाया है। इसके अलावा उसकी जूनियर रॉक्सी के रूप में सृष्टि तावड़े नजर आती हैं। लोकल डांसर रूपा के रोल में मिथिला पालकर दिखाई देती हैं, जो कहानी में रंग और ताजगी भरती हैं। वहीं मामा नाम की एक रहस्यमयी और ताकतवर महिला भी कहानी का अहम हिस्सा है, जिसका किरदार मोना सिंह निभा रही हैं।

मामा असल में उस इलाके की डॉन है और वह मारे गए गैंगस्टर जिम्मी की बेटी है। उसका अंदाज बेहद अलग है। वह कटलेट खिलाकर कोहराम मचाने वाली दबंग महिला है। मामा अंग्रेजों की फेयरनेस क्रीम के मुकाबले अपनी देसी फेयरनेस क्रीम बाजार में उतारना चाहती है। इसी मकसद से उसने उस विदेशी साइंटिस्ट को कैद कर रखा है, जिसे ढूंढने का मिशन हैप्‍पी को सौंपा गया है।

अब कहानी इस मोड़ पर पहुंच जाती है कि क्या हैप्‍पी अपने मिशन में कामयाब हो पाता है या नहीं। क्या वह मामा की दबंगई और उसके नेटवर्क का सामना कर पाएगा। क्या उसकी मासूमियत, डांस और कुकिंग की कला इस मिशन में उसके काम आएगी या फिर वह एक बार फिर नाकाम साबित होगा। इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए दर्शकों को यह फिल्म देखनी होगी, जो पैरोडी, एक्शन और कॉमेडी का अनोखा मिश्रण पेश करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed