दिसंबर में भारत का निर्यात बढ़कर 38.51 अरब डॉलर, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत प्रदर्शन

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ के कारण जारी अनिश्चितताओं के बीच भारत के व्यापारिक निर्यात में दिसंबर महीने में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक दिसंबर में देश का व्यापारिक निर्यात बढ़कर 38.51 अरब डॉलर हो गया, जो नवंबर में 38.13 अरब डॉलर था। यह इजाफा ऐसे समय में हुआ है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है और कई अर्थव्यवस्थाएं दबाव का सामना कर रही हैं।
मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में भारत का सर्विसेज निर्यात 35.50 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 17.38 अरब डॉलर दर्ज किया गया। इस तरह सर्विसेज सेक्टर में 18.12 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा। वहीं, दिसंबर में व्यापारिक आयात बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया, जो नवंबर में 62.66 अरब डॉलर था। आयात बढ़ने के कारण देश का व्यापारिक घाटा भी बढ़कर 25.04 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत के कुल निर्यात में 4.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का कुल निर्यात 850 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से दिसंबर की अवधि के दौरान अमेरिका को भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 9.8 प्रतिशत बढ़ा है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि निर्यात में विविधता लाने की रणनीति के तहत भारत मित्र देशों के साथ नई व्यापारिक साझेदारियां मजबूत कर रहा है। इसके साथ ही अमेरिका के साथ टैरिफ से जुड़े गतिरोध को सुलझाने के लिए बातचीत भी जारी है, ताकि निर्यातकों को स्थिर और अनुकूल माहौल मिल सके।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ता और निर्यात प्रोत्साहन मिशन की शुरुआत को अपने मंत्रालय के पिछले 10 दिनों के प्रमुख प्रयासों में शामिल किया है। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ के व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविक के साथ सार्थक चर्चा हुई, जिसमें प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के अहम पहलुओं पर विस्तार से विचार किया गया। पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों पक्षों ने एक निष्पक्ष, संतुलित और महत्वाकांक्षी समझौते को अंतिम रूप देने के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया, जो साझा मूल्यों, आर्थिक प्राथमिकताओं और नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के अनुरूप हो।
