पश्चिम एशिया संकट के बीच पीएम मोदी की देशवासियों से बड़ी अपील, विदेशी खर्च और ईंधन खपत घटाने का आह्वान

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों के सामने सात महत्वपूर्ण सुझाव रखे और कहा कि यह समय देश की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है और ऐसे समय में हर नागरिक का योगदान बेहद अहम हो जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करने और कार पूलिंग अपनाने की अपील की। उनका कहना था कि यदि लोग छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ी हुई हैं। हालात ऐसे हैं कि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है और हाल ही में इसकी कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो पिछले 52 सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर माना गया।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से विवेकपूर्ण खर्च करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोग एक वर्ष के लिए विदेश यात्रा टालने जैसे फैसलों पर विचार कर सकते हैं ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। उन्होंने विदेशों में भव्य शादी समारोह आयोजित करने और अत्यधिक सोने की खरीदारी जैसे खर्चों को सीमित करने की भी अपील की। उनका मानना है कि यदि देशवासी जरूरत के अनुसार खर्च करने की आदत अपनाएं तो इससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था को फिर से बढ़ावा देने की बात भी कही। उनका कहना था कि इससे ईंधन की खपत कम होगी, ट्रैफिक का दबाव घटेगा और ऊर्जा की बचत भी संभव हो सकेगी। उन्होंने किसानों से भी विशेष आग्रह किया कि वे खाने के तेल के उपयोग में कमी लाने के साथ-साथ आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने की दिशा में काम करें। प्रधानमंत्री ने जैविक खेती और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव जरूरी हैं।
उन्होंने एक बार फिर “वोकल फॉर लोकल” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्थानीय उत्पादों, स्वदेशी उद्योगों और जैविक कृषि को प्राथमिकता देनी होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि देशवासी मिलकर प्रयास करेंगे तो भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभरेगा।
