वैश्विक संकट के बीच अश्विनी वैष्णव की अपील, विदेशी मुद्रा बचाने के लिए खर्च कम करें

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देशवासियों और कारोबारियों से अपील की है कि वे वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता वाले खर्चों को कम करने की दिशा में गंभीरता से कदम उठाएं। नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय कई आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित किया है। ऐसे समय में भारत को अपनी आर्थिक मजबूती बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी और समझदारी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हर नागरिक और व्यवसाय को यह समझना होगा कि विदेशी मुद्रा देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यदि अनावश्यक आयात आधारित खर्चों को कम किया जाए और घरेलू विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए तो इससे देश की विदेशी मुद्रा बचत में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी बड़ा आर्थिक योगदान दिया जा सकता है। चाहे वह विदेशी उत्पादों के उपयोग को सीमित करना हो या ऐसे खर्चों में कटौती करना हो जिनसे विदेशी मुद्रा बाहर जाती है, हर कदम देश के हित में अहम साबित हो सकता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच का भी उल्लेख किया जिसमें आत्मनिर्भरता और आर्थिक संतुलन पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। वैष्णव ने कहा कि केवल विदेशी मुद्रा बचाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि देश को विदेशी मुद्रा कमाने के नए अवसर भी पैदा करने होंगे। उन्होंने कहा कि भारत के पास आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल सेवाओं और निर्यात जैसे क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं। यदि इन क्षेत्रों को और मजबूत किया जाए तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और बेहतर बना सकता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में आर्थिक अनुशासन बेहद जरूरी हो जाता है। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे आयात पर निर्भरता कम करने और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियां अपनाएं। उनका मानना है कि यदि उद्योग और आम नागरिक दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएं तो भारत की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आने वाले वर्षों में देश के सामने कई बड़े अवसर मौजूद हैं। लेकिन इन अवसरों का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब आर्थिक संसाधनों का संतुलित उपयोग किया जाएगा। विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखना राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है और इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम में मौजूद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता को लेकर सरकार की सोच का समर्थन किया। वैश्विक तनाव और आर्थिक दबावों के बीच सरकार का यह संदेश साफ माना जा रहा है कि भारत आने वाले समय में मजबूत आर्थिक नीति और जिम्मेदार खर्च के जरिए अपनी स्थिति को और सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
