मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास पर पारंपरिक उल्लास के साथ मनाई गई होली
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निजी आवास नगला तराई, खटीमा में इस वर्ष होली का पर्व पारंपरिक उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। सुबह से ही आवास परिसर में रंग, संगीत और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। विभिन्न क्षेत्रों से आए होल्यारों और स्थानीय नागरिकों का स्नेहपूर्ण स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री स्वयं अपने परिवार के साथ उपस्थित रहे और सभी अतिथियों का आत्मीय अभिवादन किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं और सभी को अबीर-गुलाल लगाकर पर्व की बधाई दी। वातावरण पूरी तरह से पारंपरिक रंगों में रंगा हुआ था। होल्यारों के चेहरे पर उत्साह और आनंद साफ झलक रहा था। मुख्यमंत्री भी उनके साथ घुलते-मिलते नजर आए, जिससे आयोजन में आत्मीयता का भाव और प्रगाढ़ हो गया। यह अवसर केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और पारिवारिक माहौल का प्रतीक बन गया।
होली मिलन समारोह में विभिन्न समुदायों की महिलाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को विशेष बना दिया। हिंदी, कुमाऊंनी, थारू और बंगाली लोक परंपराओं पर आधारित होली गीतों ने पूरे वातावरण को मधुर बना दिया। पारंपरिक लोकधुनों पर प्रस्तुत किए गए गीतों और नृत्यों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विविध सांस्कृतिक रंगों का यह संगम उत्तराखंड की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत कर रहा था। मुख्यमंत्री भी लोकधुनों पर होल्यारों के साथ झूमते नजर आए, जिससे माहौल और अधिक जीवंत और उल्लासपूर्ण हो गया।
स्थानीय नागरिकों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। लोगों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। यह आयोजन विविधता में एकता और सामाजिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। रंगों के इस पर्व ने सभी वर्गों और समुदायों को एक मंच पर जोड़ दिया, जहां आपसी प्रेम और सद्भाव की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि होली का पर्व आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। समाज में पारस्परिक सहयोग और सौहार्द की भावना को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस उत्सव को यादगार बनाया। पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच मनाई गई यह होली न केवल एक उत्सव थी बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत प्रतीक भी बनी।
