शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटा, निवेशकों में बढ़ी घबराहट

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी उतार-चढ़ाव के बीच बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई। कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई थी और शुरुआती घंटों में बाजार मजबूत दिखाई दे रहा था, लेकिन दिन के अंतिम चरण में अचानक तेज बिकवाली शुरू हो गई। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता इस गिरावट की मुख्य वजह रही।
कारोबार समाप्त होने तक सेंसेक्स 1,000 अंकों से ज्यादा टूटकर 74 हजार के स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी भारी गिरावट के साथ 23,500 के आसपास बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में बाजार में काफी अस्थिरता देखने को मिली। एक समय निफ्टी 24 हजार के स्तर के करीब पहुंच गया था, लेकिन बाद में अचानक बिकवाली बढ़ने से इसमें तेज गिरावट आ गई। सेंसेक्स में भी यही रुझान देखने को मिला, जहां शुरुआती मजबूती अंत तक टिक नहीं सकी।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी-ईरान समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया। विदेशी बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। इसके अलावा आखिरी घंटे में हुई भारी बिकवाली ने बाजार की स्थिति को और कमजोर बना दिया। कई बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में निफ्टी के लिए 23,500 का स्तर काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे बना रहता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में निफ्टी 23,300 से 23,200 के स्तर तक भी फिसल सकता है। वहीं ऊपर की ओर 23,750 से 23,800 का स्तर तत्काल प्रतिरोध माना जा रहा है, जबकि 24,000 का स्तर मजबूत बाधा के रूप में देखा जा रहा है।
व्यापक बाजार में भी कमजोरी साफ नजर आई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका असर छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों पर अधिक दिखाई दिया। भारी वजन वाले शेयरों में गिरावट ने बाजार को और नीचे खींचा। रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईटीसी जैसे प्रमुख शेयरों में तेज कमजोरी देखने को मिली, जिससे सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया।
हालांकि आईटी सेक्टर ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत मजबूत रहे और इस क्षेत्र में सीमित बढ़त दर्ज की गई। इसके बावजूद समग्र बाजार धारणा कमजोर बनी रही।
इसके अलावा मानसून को लेकर जारी अनुमान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से कम बारिश की संभावना जताए जाने के बाद बाजार में नकारात्मक माहौल और गहरा गया। निवेशकों को आशंका है कि कमजोर मानसून का असर ग्रामीण मांग और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव आने वाले महीनों में बाजार पर दिखाई दे सकता है।
