शीतल देवी बनीं ‘पैरा आर्चर ऑफ द ईयर’, अद्भुत प्रदर्शन से रचा इतिहास
भारतीय पैरा तीरंदाजी की उभरती सितारा Sheetal Devi ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। उन्हें वर्ल्ड आर्चरी द्वारा ‘पैरा आर्चर ऑफ द ईयर’ के खिताब से सम्मानित किया गया है, जो उनके शानदार प्रदर्शन और लगातार मेहनत का परिणाम है। इस सम्मान के बाद शीतल देवी ने अपनी खुशी और आभार व्यक्त करते हुए इसे अपने जीवन का बेहद खास पल बताया।
पिछले एक साल में शीतल देवी ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई है। उनका यह सम्मान एक ऐतिहासिक सीजन का नतीजा है, जिसमें उन्होंने कई बड़ी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। ग्वांगजू में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा चैंपियनशिप में उन्होंने अपना पहला विश्व खिताब जीता और इतिहास रच दिया। वह बिना हाथों के इस प्रतियोगिता को जीतने वाली पहली महिला तीरंदाज बनीं, जिसने खेल जगत को हैरान कर दिया।
इस प्रतियोगिता में उन्होंने कंपाउंड महिला व्यक्तिगत फाइनल में पैरालंपिक चैंपियन ओज्नुर क्यूर गिर्दी को हराकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। इसके अलावा टीम इवेंट में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने महिला टीम स्पर्धा में रजत और मिश्रित टीम प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया। इन उपलब्धियों ने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाजों में शामिल कर दिया है।
शीतल देवी की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2025 में उन्हें ‘बीबीसी इमर्जिंग एथलीट ऑफ द ईयर’ का पुरस्कार भी मिला, जिससे वह यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय तीरंदाज बनीं। यह उपलब्धि उन्होंने पेरिस पैरालंपिक खेलों में राकेश कुमार के साथ मिश्रित टीम में कांस्य पदक जीतने के बाद हासिल की। इससे पहले भी उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें वर्ल्ड आर्चरी पैरा वुमन ऑफ द ईयर और एशियाई पैरालंपिक समिति का सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट पुरस्कार शामिल है। इसके अलावा उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।
उनकी प्रतिभा और मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें एबल-बॉडीड कंपाउंड आर्चरी टीम में भी जगह मिली। जेद्दा में आयोजित एशिया कप के लिए भारतीय टीम में चयनित होना उनके असाधारण कौशल को दर्शाता है। यह उपलब्धि बताती है कि वह केवल पैरा खेलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मुख्यधारा की प्रतियोगिताओं में भी अपनी पहचान बना रही हैं।
फोकोमेलिया नामक जन्मजात शारीरिक स्थिति के साथ जन्म लेने के बावजूद शीतल देवी ने कभी हार नहीं मानी। बिना हाथों के तीरंदाजी करना अपने आप में एक अनोखी और चुनौतीपूर्ण कला है, लेकिन उन्होंने अपनी विशेष तकनीक से इसे संभव कर दिखाया। उनकी यह तकनीक दुनिया भर में चर्चा का विषय बन चुकी है और कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच नामित होना और फिर यह सम्मान जीतना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उन्होंने अपने इस सफर में साथ देने वाले सभी लोगों का दिल से धन्यवाद किया। उनकी कहानी न केवल खेल जगत के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
