सुवेंदु अधिकारी ने ली पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ, पीएम मोदी और धर्मेंद्र प्रधान ने दी बधाई

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज हुआ है, जहां भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में पहली बार सरकार बनाकर नया इतिहास रच दिया। इसी ऐतिहासिक मौके पर सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कोलकाता में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में पार्टी के शीर्ष नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। माहौल उत्साह, उम्मीद और राजनीतिक संदेशों से भरा नजर आया।
सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने को भाजपा अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रही है। विधानसभा चुनाव में दमदार जीत के बाद पार्टी ने राज्य की सत्ता हासिल की और अब नई सरकार से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। भाजपा ने इस मौके को केवल सत्ता परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि बंगाल में अपने स्थायी राजनीतिक विस्तार की शुरुआत के रूप में पेश किया है। पार्टी का दावा है कि यह सरकार जनता के बीच भरोसा और विकास की नई भाषा लेकर आएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देते हुए इसे पश्चिम बंगाल के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सुवेंदु अधिकारी ऐसे नेता हैं जो लोगों से गहराई से जुड़े रहे हैं और उनकी आकांक्षाओं को बहुत करीब से समझते हैं। प्रधानमंत्री ने उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस अवसर पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बंगाल की सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक यात्रा का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया और कहा कि बंगाल ने देश को ऐसे महान विचारक, समाज सुधारक, लेखक और राष्ट्रवादी नेता दिए हैं जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव को मजबूत किया।
धर्मेंद्र प्रधान ने ‘सोनार बांग्ला’ की भावना को भी रेखांकित किया और कहा कि यह केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि जनता की बेहतर भविष्य की आकांक्षा का प्रतीक है। उनके अनुसार, बंगाल आज उस मोड़ पर खड़ा है जहां उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नई राजनीतिक उम्मीदें एक साथ आगे बढ़ रही हैं। यही वजह है कि इस शपथ ग्रहण को केवल एक औपचारिक घटना नहीं, बल्कि नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर भी लंबा और अनुभव से भरा रहा है। उन्होंने 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में अपनी राजनीति शुरू की थी। इसके बाद वे कई बार निर्वाचित हुए और स्थानीय से लेकर राज्य स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत की। उनके पास विधायी और संगठनात्मक दोनों तरह का लंबा अनुभव है। वे दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।
नई सरकार में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक जैसे नेताओं को भी मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है। इससे भाजपा ने यह संदेश दिया है कि वह राज्य में अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को साथ लेकर चलना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह सरकार सिर्फ चुनावी जीत का नतीजा नहीं, बल्कि बंगाल में लंबी राजनीतिक जमीन तैयार करने की रणनीति भी है।
