उत्तराखंड में रेल परियोजनाओं को रफ्तार देने की मांग, डिजिटल कुम्भ 2027 की तैयारियां तेज

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उत्तराखंड के विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw से मुलाकात कर राज्य में रेल संपर्क को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से काम करने का अनुरोध किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय द्वारा राज्य को मिल रहे सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश के लिए सामरिक, भौगोलिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, जिससे यातायात पर काफी दबाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मेरठ से हरिद्वार और ऋषिकेश तक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के विस्तार की जरूरत बताई। उनका कहना है कि दिल्ली से मेरठ के बीच इस प्रणाली के सफल संचालन से यात्रियों को समय और ईंधन दोनों की बचत हुई है, और इसी तरह की सुविधा उत्तराखंड तक भी पहुंचनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की प्रगति पर संतोष जताते हुए इसके पहले चरण को वर्ष 2026 तक पूरा करने की मांग की। यह परियोजना राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों को बेहतर तरीके से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा उन्होंने कुमाऊं क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए टनकपुर-बागेश्वर रेल परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने और बागेश्वर-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए अंतिम लोकेशन सर्वे की अनुमति देने का अनुरोध किया।

इसके साथ ही हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के दोहरीकरण, रायवाला बाई-डक ब्रिज के विकास और चारधाम रेल परियोजना के विभिन्न हिस्सों पर तेजी से काम करने की आवश्यकता भी जताई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि डोईवाला-उत्तरकाशी और कर्णप्रयाग-पीपलकोटी रेल खंडों के सर्वे को जल्द पूरा कर स्वीकृति दी जानी चाहिए, ताकि इन परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू हो सके। उन्होंने मोहंड-देहरादून-सहारनपुर रेल लाइन को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

इन सभी परियोजनाओं को राज्य के संतुलित और समग्र विकास के लिए जरूरी बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे राज्य के दूरदराज क्षेत्रों को भी मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कुम्भ 2027 की तैयारियों को लेकर भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस बार कुम्भ को डिजिटल स्वरूप देने की योजना है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस डिजिटल कुम्भ परियोजना के लिए लगभग 143.96 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि केंद्र के सहयोग से कुम्भ 2027 का आयोजन आधुनिक तकनीक के साथ सफलतापूर्वक किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सकेगा।

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