कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: झंडू कुमार ने जीता भारत का पहला पदक, संघर्ष से रचा ब्रॉन्ज मेडल का इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अपने पदकों का खाता खोल दिया है। पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ी झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने न केवल देश को प्रतियोगिता का पहला पदक दिलाया, बल्कि अपने वर्षों के संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प को भी सफलता की नई पहचान दी। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी का माहौल है और उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झंडू कुमार की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि कांस्य पदक जीतना केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि यह वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और कभी हार न मानने वाले जज्बे का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ी देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने झंडू कुमार को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं।
केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि झंडू कुमार ने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर भारत को पहला पदक दिलाया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन भारतीय पैरा खिलाड़ियों की बढ़ती क्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। खेल मंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले मुकाबलों में भी भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन करेंगे।
झंडू कुमार की सफलता की कहानी केवल एक पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कठिन परिस्थितियों से लड़कर अपने सपनों को सच करने की प्रेरक मिसाल भी है। आर्थिक कठिनाइयों के दौर में उन्हें परिवार का पालन-पोषण करने के लिए ई-रिक्शा चलाना पड़ा और सब्जियां बेचकर अपनी आजीविका चलानी पड़ी। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने खेल को कभी नहीं छोड़ा। लगातार अभ्यास, आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर उन्होंने खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाया।
अपनी जीत के बाद झंडू कुमार ने कहा कि उन्होंने जीवन में कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उनका हमेशा से सपना था कि एक दिन वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतेंगे। उन्होंने कहा कि यह कांस्य पदक सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का सम्मान है जिन्होंने कठिन समय में उन पर विश्वास बनाए रखा और उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सफलता उन्हें भविष्य में और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देगी।
पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में नाइजीरिया के रिलुवान इदरीस ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक हासिल किया। झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता की शानदार शुरुआत दिलाई। उनकी यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है और इससे देश के युवा खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी निश्चित रूप से बढ़ेगा।
