रेलवन ऐप का बढ़ता क्रेज: 4.55 करोड़ डाउनलोड, रोज 9.65 लाख टिकट बुक, फर्जी खातों पर रेलवे की बड़ी कार्रवाई

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भारतीय रेलवे की डिजिटल सेवाएं लगातार मजबूत होती जा रही हैं और इसका सबसे बड़ा उदाहरण रेलवन (RailOne) ऐप की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए इस ऐप को अब तक 4.55 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। बड़ी संख्या में लोग अपनी रेल यात्रा से जुड़ी लगभग सभी आवश्यक सेवाओं के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि प्रतिदिन औसतन 9.65 लाख टिकट इसी ऐप के माध्यम से बुक किए जा रहे हैं, जिससे यह रेलवे के सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म में शामिल हो गया है।

रेलवन ऐप को इस तरह तैयार किया गया है कि यात्रियों को अलग-अलग सेवाओं के लिए कई ऐप या वेबसाइट का सहारा न लेना पड़े। एक ही प्लेटफॉर्म पर आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, पीएनआर स्टेटस, ट्रेन की लाइव जानकारी और रेलमदद जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हैं। यही कारण है कि यात्रियों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। रोजाना लाखों लोग इस ऐप के जरिए अपनी यात्रा की योजना बनाते हैं और टिकट बुक करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 2.75 लाख आरक्षित टिकट और लगभग 6.89 लाख अनारक्षित टिकट इसी ऐप के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं।

ऑनलाइन टिकट बुकिंग के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। जून 2025 से जून 2026 के बीच कुल 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन माध्यम से खरीदे गए, जबकि केवल 7.18 करोड़ टिकट रेलवे काउंटर से जारी हुए। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि अब अधिकांश यात्री डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऑनलाइन बुकिंग की बढ़ती हिस्सेदारी रेलवे की तकनीकी व्यवस्था पर यात्रियों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाती है।

डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ रेलवे ने टिकट बुकिंग में होने वाली धोखाधड़ी और फर्जी गतिविधियों पर भी सख्ती दिखाई है। जनवरी 2024 से 30 जून 2026 तक 6.68 करोड़ से अधिक संदिग्ध यूजर खातों को निष्क्रिय किया गया है। इसके अलावा 6.22 करोड़ से अधिक खातों को दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक अस्थायी रूप से निलंबित रखा गया। इन खातों की पहचान संदिग्ध मोबाइल नंबर, ईमेल डोमेन और आईपी एड्रेस जैसी तकनीकी जांच के आधार पर की गई, जिससे फर्जी बुकिंग नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सका।

तत्काल टिकट बुकिंग को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे ने आधार सत्यापन को अनिवार्य कर दिया है। अब ऑनलाइन तत्काल टिकट और अग्रिम आरक्षण अवधि (ARP) के टिकट केवल आधार सत्यापित उपयोगकर्ता ही बुक कर सकते हैं। कुछ चुनिंदा ट्रेनों में आधार आधारित ओटीपी सत्यापन की सुविधा भी लागू की गई है। इस व्यवस्था से फर्जी खातों और स्वचालित बॉट के जरिए होने वाली टिकट बुकिंग पर काफी हद तक रोक लगी है, जिससे वास्तविक यात्रियों को टिकट मिलने की संभावना बढ़ी है।

रेलवे ने अपनी डिजिटल प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक साइबर सुरक्षा तकनीकों को भी अपनाया है। कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN), एंटी-बॉट सिस्टम, वेब एप्लिकेशन फायरवॉल, डीडीओएस सुरक्षा और सुरक्षित डीएनएस जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग से पिछले छह महीनों के दौरान औसतन 57.74 प्रतिशत फर्जी बॉट ट्रैफिक को सफलतापूर्वक रोका गया। इससे वेबसाइट और ऐप की कार्यक्षमता बेहतर हुई है और वास्तविक उपयोगकर्ताओं को बिना किसी बाधा के सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए रेलमदद प्लेटफॉर्म भी लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 6.94 लाख मामलों में यात्रियों को सहायता प्रदान की गई। इनमें से करीब 89.49 प्रतिशत यात्रियों ने सेवा को उत्कृष्ट या संतोषजनक बताया। वहीं, पिछले तीन वर्षों में शिकायतों के निस्तारण की सफलता दर लगभग 99.98 प्रतिशत दर्ज की गई, जो रेलवे की सेवा गुणवत्ता में सुधार का संकेत है।

टिकटों की कालाबाजारी और दलालों पर भी रेलवे लगातार कार्रवाई कर रहा है। वर्ष 2021 से जून 2026 तक रेलवे सुरक्षा बल ने 22,676 दलालों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा संदिग्ध टिकट बुकिंग से जुड़े मामलों की निगरानी लगातार की जा रही है। वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान 30 जून 2026 तक राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर संदिग्ध टिकट बुकिंग से संबंधित 530 शिकायतें दर्ज की गईं। साथ ही 13,343 संदिग्ध ईमेल डोमेन को भी ब्लॉक किया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद ऑनलाइन टिकट बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराना है।

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