सिंहस्थ-2028 की तैयारियां तेज, उज्जैन में 1133 करोड़ की हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना का भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्राम हरियाखेड़ी में 1133.67 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली हरियाखेड़ी जल आवर्धन परियोजना का भूमि-पूजन करते हुए कहा कि यह योजना न केवल सिंहस्थ मेले के दौरान बल्कि भविष्य में भी उज्जैन शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ आस्था का महापर्व है और इसकी व्यवस्थाएं प्रदेश की पहचान से जुड़ी हैं, इसलिए सरकार स्थायी बुनियादी ढांचे के निर्माण पर विशेष ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 24 महीनों में पूरी होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 708 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया जाएगा। इसके साथ ही 17 नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे और आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके। योजना के अंतर्गत 49 हजार से अधिक नए घरेलू जल कनेक्शन भी दिए जाएंगे। हरियाखेड़ी, गंभीर, उंडासा और साहिबखेड़ी को प्रमुख जल स्रोत के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे सिंहस्थ के दौरान भारी भीड़ के बावजूद जल आपूर्ति प्रभावित न हो।
सरकार के अनुमान के मुताबिक सिंहस्थ-2028 में उज्जैन की स्थायी जनसंख्या करीब 9.65 लाख रहेगी जबकि मेला क्षेत्र में अस्थायी जनसंख्या 21.83 लाख तक पहुंच सकती है। शाही स्नान के दिनों में एक ही दिन में लगभग 2.28 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए आसपास के 20 गांवों को भी इस योजना में शामिल किया गया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 47.23 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 11 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज्य सरकार अंत्योदय के सिद्धांत पर काम कर रही है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए प्रोजेक्ट संवर्धन की शुरुआत की गई है। कार्यक्रम में मेधावी छात्रों का सम्मान और सफाई कर्मियों को किट वितरण भी किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में आयुर्वेद के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए धनवंतरी इंस्टीट्यूट खोलने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को जल्द ही बड़ी सौगात मिलेगी।
उन्होंने कहा कि उज्जैन को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। महाकाल लोक के विस्तार और सिंहस्थ की व्यापक तैयारियां इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। क्षिप्रा नदी के घाटों पर लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था की जा रही है। रामघाट के पास एक छोटा और एक बड़ा पुल निर्माणाधीन है। मार्च में गीता भवन का लोकार्पण प्रस्तावित है और उज्जैन-इंदौर फोर लेन सड़क का भूमि-पूजन भी जल्द किया जाएगा। शहर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में भी योजनाबद्ध तरीके से काम जारी है।
कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने कहा कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए सड़क, सीवर और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक कार्यक्रम में मौजूद रहे।
स्पष्ट है कि इस बार सिंहस्थ की तैयारी केवल आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि स्थायी विकास और बुनियादी ढांचे के सशक्त निर्माण पर सरकार का विशेष फोकस है, ताकि उज्जैन आने वाले वर्षों में भी बेहतर सुविधाओं के साथ देश और दुनिया के श्रद्धालुओं का स्वागत कर सके।
